नुसरत जहाँ इस बार के सांसदों में सबसे प्रचलित सांसदों में से एक हैं। उनके सांसद बनने के बाद उनका एक हिन्दू बिज़नसमैन निखिल जैन से तुर्की में शादी करना, उसके बाद संसद में शपथ लेते वक्त वंदे मातरम बोलना हिन्दू परंपरा के अनुसार सिन्दूर लगाकर आना फिर लोक सभा स्पीकर ओम बिरला के पाँव छूना और अब जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होकर पूजा अर्चना करना उनको एक कट्टरवादी और रूढ़िवादी छवि से दूर ले जाता है और एक नए भारत के नए समाज के दर्शन करवाता है जो कट्टरवादी समाज की सोच को बदलने के लिए बहुत अच्छा है।

 

नुसरत के इस अंदाज़ से जहाँ एक तरफ पूरा देश उनकी तारीफ कर रहा है वहीँ पर नुसरत का यह अंदाज शायद कट्टरपंथी मौलानाओं को रास नहीं आ रहा है और इसलिए वो नुसरत जहाँ की इस सेक्युलर विधान से नाराज़ नज़र आ रहे हैं और कई कट्टरपंथियों ने तो अपने धार्मिक स्थलों से तमाम फतवे निकालने शुरू कर दिए हैं ताकि उनकी दुकान चलती रहे और ध्यान रहे यह वही धर्म के ठेकेदार हैं जिनके धर्म को जीन्स पहनने से बुर्का नहीं लगाने से मंदिर चले जाने से तुरंत खतरा महसूस होने लगता है और ये सब्ज़ियों की तरह फतवे जारी करने लगते हैं ।

 

मैं धर्म की ठेकेदारों से पूछना चाहता हूं की क्या वे फतवे सिर्फ मुस्लिम महिलाओं पर क्यों जारी होते हैं। फतवे उन मुस्लिम पुरुषों पर "मुल्ला" क्यों नहीं जारी करते जो "मुन्नी को बदनाम करते हैं" फतवा उन पर क्यों जारी नहीं करते जो चार -चार शादियां करते हैं। क्या सारा सरिया कानून सिर्फ महिलाओं के लिए बना है..

 

फतवा उस बलात्कारी पर क्यों नही जो कल दिल्ली में 5 साल की बच्ची से रेप करने वाले मोहम्मद नन्हे पर क्यों नही फतवे जारी किये ।

 

 जिस नीच ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया उसका चेहरा सी.सी. टीवी फुटेज में साफ तौर पर नजर आ रहा है। उसी फुटेज के सहारे पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

 

24 वर्षीय खूनी भेडिये का नाम मोहम्मद नन्हे है। बच्ची की हालत बहुत ही नाजुक है वह सदफरगंज अस्पताल में भर्ती है।

 

अब मुंह नहीं खुलेगा खूनी भेडियों के शुभचिंतकों का ..

 

बहरहाल नुसरत जहाँ ने सभी कट्टरपंथियों को एक आईना दिखाने का काम किया है और यह बता दिया है कि पूजा अर्चना करने से, दूसरे धर्म में विवाह करने से और वंदे मातरम बोलने से कट्टरवादियों का धर्म खतरे में नहीं आता है बल्कि यह गंगा जमुना तहजीब को और आगे बढ़ाता है।

 

जब लोगों द्वारा ये पुछा गया की नुसरत आप तो मुस्लिम हैं  फिर यहाँ मंदिर में पूजा अर्चना कैसे  करने आई हैं तो नुसरत का जवाब जो था वो हम सब लोगों के लिए प्रेरणादायक है, उन्होंने कहा "मैं उन बातों पर ध्यान नहीं देती, जो निराधार हैं। मैं अपना धर्म जानती हूँ। मैं जन्म से मुसलमान हूँ और अब भी मुसलमान हूँ। यह सब विश्वास के बारे में है। आपको इसे अपने दिल से महसूस करना होगा और आपके दिमाग से नहीं।"

 

उन्होंने मंदिर के लोगों को धन्यवाद देते हुए यह भी कहा कि

 

मैं धन्य हूँ कि भगवान ने मुझे अवसर दिया। युवा भारत समावेशी भारत धर्मनिरपेक्षता मानवता के लिए खड़ा है। मुझे आमंत्रित करने के लिए मैं इस्कॉन की आभारी हूँ।"

 

यह एक नए समाज के दर्शन को दर्शाता है और समाज में ऐसी ही कई नुसरत जहाँ का निकलना जरूरी है तब जाकर ही देश के कट्टरवादियों को एक सन्देश दिया जा सकता है और इनकी दुकान बंद की जा सकती है और हम देश को एक नयी दिशा की ओर ले जा सकते हैं।

 

-आचार्य अनूपदेव

 

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