आमतौर पर देखा जाये तो जिस देश  में पबलिक शोचालय का लोटा जंजीर में बांधना पडता हो, करोडो रपये के लेन-देन करने वाले बैंक में दो रपये की पेनसिल धागे में बांधनी पडती हो,  उस देश  को भरषटाचार मकत देखने का सपना मातर क भरम जैसा है। किनत फिर भी जिस     परकार सरकारे आरथिक भरषटाचार या राजनैतिक भरषटाचार को राषटर के लिये खतरा बन जाने  पर  कानून परभावी करती है। उसी परकार से धारमिक भरषटाचार जैसे विषय पर भी क बार सरकारो को धयान दिये जाने की आवषयकता है। कयोंकि इस भरषटाचार की चपेट में समाज का  क तबका इस तरीके डूब चका है जिसका बच पाना बहत मशकिल है। लेकिन सरकार चाहे  तो कठोर कानून और सामाजिक जागरति आनदोलन क हद तक इससे पार पाया जा  सकता  है। कयोंकि इस भरषटाचार में लिपत कोई बडे सेठ,साहूकार या करसी पर विराजमान राजनेता नहीं है। बलकि  लिपत है, तो कछ ाड-फूंक करने वाले ओा,जिनहें देहात की भाषा में सयाने और शहरी  भाषा में बाबा या तातरिंक कहते है। जो खद को सिदध बाबा कहते है। अभी हाल ही में से ही क तातरिक बाबा के कहने पर उततर परदेश  के कानपर देहात के सिकंदरा कषेतर में क वयकति दवारा अपनी बेटी की हतया करने का मामला सामने आया। बताया जा रहा है कि उसने अमीर   होने के लिये अपनी बेटी की हतया कर दी। आप सोच रहे होगें में इसे धारमिक भरषटाचार कयों कहा कयोकि ये सारे ककृतय जैसे औलाद के लिये बलि हो, औलाद हो जाये तो धन के लिये बलि, कहीं बरसात के लिये बलि,तो कहीं बिमारी से निजात पाने के लिये बलि सब के सब धरम की आड में होते है और करवाने वाले बाबा,तातरिक ओा,खद को धरम से जडा बताते है। अभी कछ दिनों पहले की घटना है। मे लिखने में शरम आ रही है,आपको पढनें में शरम आयेगी ममबई के घाटकोपर इलाके में पलिस ने यवती से दषकरम करने के आरोप में क तातरिक बाबा को गिरफतार किया है। इस बाबा पर आरोप यह था कि उसने पिडित यवती के पिता की  बीमारी ठीक करने के बहाने उसकी 25 वरषीय पतरी को बेहोश कर बलातकार किया।

कारण उस लड़की का पिता बीमार था और ये तांतरिक उसकी आड़ में ाड़फूंक करने बहाने इस अपराध को करने से नही हिचकिचाया |    आमतौर देखा  जाये तो भले ही हम इककीसवीं सदी में परवेश कर गये हो, और हम खद को अंतरराषटरीयसतर पर कितनी भी अचछी छवि में परोसते नजर आ रहे हो पर सच  भारत देश का क तबका आज भी बिमारी में असपतालो में जाने के बजाय इन ढोगियों के चककर में फंस जाता है। न जाने औलाद पाने की चाह में कितनी औरते इन बाबाओं की वासना का शिकार होती है। कितनी ओरतों को इन बाबाओ के कहने पर डायन जेसा कालपनिक  नाम देकर मारा जाता है, या वासना की पूरति के लि सरेआम बलातकार किया जाता है से किससे अखबारों में रोज पढने सनने को मिलते है और

इन सब ककरतयो में इन लोगो इतनी गलती नही मानता, जितनी भारत सरकार की कयोंकि जाने कितने हाजी,नमाजी,तातरिक बाबा अपने विजञापन अखबारो में देते है। जो मनषयों के सब कषटों के निवारण का दावा 5 मिनट में करते है। और सरकार उनके खिलाफ कोई कारवाही नही करती और ये लोग खले तौर इस  धारमिक करमकांड की आड में हतया,बलातकार,आरथिक शोषण, शारारिक शोषण, वयाभिचार आदि अपराधो को जनम   देते रहते है ।  जब तक भारत सरकार इन तांतरिको के खिलाफ कारवाही नही करेगी तब तक ये धारमिक भरषटाचार होता रहेगा और देश शरमसार होता रहेगा..

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