Virat Janjatiya Vedic Sammelan

Virat Janjatiya Vedic Sammelan organised by Akhil Bhartiya Dayanand Sewashram

विपरीत परिस्थितियों, विचारों की प्रतिकूल विचारधारा के वातावरण में जन और धन के अभाव में भी यदि अभूतपूर्व सबको आश्चर्यचकित करने वाला कोई कार्यक्रम सम्पन्न हो जाए तो उसकी प्रशंसा के लिए प्रत्येक शब्द छोटा पड़ जाता है।

यह एक कोरी कल्पना पर निर्मित विचार या जुमला नहीं अपितु दिनांक 19 से 21 नवम्बर 2016 को नागालैण्ड, असम में दयानन्द सेवाश्रम के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में यह चरितार्थ हुआ है। कार्यक्रम की भव्यता, व्यवस्था, सुन्दरता और  गरिमामय मंच, अविश्वसनीय अपार जनसमूह की उपस्थिति यह सब कुछ अवर्णनीय हो गया।    

छोटे से छोटे आदिवासी नागरिक से लेकर प्रदेश के अनेक प्रतिष्ठित जन सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार एवं दोनों प्रदेशों के राज्यपाल, नागालैण्ड के मुख्यमन्त्री, शिक्षामन्त्री, विधायक, जाति व ग्राम के प्रमुख, सभी एकमत से कार्यक्रम को अभूतपूर्व बताते हुए आयोजकों की सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा की, दयानन्द सेवाश्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे थे।

ग्रामीण क्षेत्र दूर दराज से, वाहनों से तथा पैदल कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे हजारों की संख्या में स्त्री-पुरुष जिनमें अधिकांश नवयुवक-युवतियां और बालक बालिकाएं भी थीं।

आयोजन था महाशय धर्मपाल जी के सहयोग से धनश्री (असम) में लगभग 4 से साढ़े चार करोड़ की लागत से निर्मित विद्यालय का उद्घाटन और दीमापुर (नागालैण्ड) में छात्रावास और विद्यालय के नव निर्माण का शिलान्यास। साथ ही  जन-जाति वैदिक विराट सम्मेलन एवं शिक्षा, संस्कृति, छात्रावास की वृद्धि पर विचार एवं सहयोग।

जिस प्रयोजन को लेकर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, उसकी सफलता का जो अनुमान था उस अनुमान से कई गुना अधिक सफलता मिली। नागालैण्ड व असम को जो भेंट, सहयोग की दानी महानुभावों ने जो सौगात दी वह ऐतिहासिक उपलब्धि बन गई। इन तीन दिनों की सफलता, सक्रियता, चेतना और दानशीलता के साथ अदम्य उत्साह, नवचेतना का वर्णन होना संभव नहीं किन्तु कुछ प्रमुख बिन्दुओं पर अपनी लेखनी से कुछ दर्शाने का प्रयास कर रहा हूं।

पूर्व निश्चयानुसार दिनांक 19/11/2016 करे दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेश, कोलकाता, पंजाब से बड़ी संख्या में आर्यजन जिनमें अनेक आशीर्वाददाता वृ(जन कार्यक्रम के साक्षी बन वहां पहुंचे। कुछ व्यक्ति 18 की रात्रि में ही दीमापुर (नागालैण्ड) पहुंच गए थे। कार्य की सफलता हेतु कुछ दयानन्द सेवाश्रम संघ के प्रमुख कार्यकत्र्ता व पदाधिकारी 10 दिन पहले तैयारी हेतु पहुंच गए थे, इनमें आचार्य दयासागर, जीव वर्धन शास्त्री, सन्तोष शास्त्री और इनके कुछ सहयोगी थे। श्री जोगेन्दर खट्टर कार्यवाहक प्रधान दयानन्द सेवाश्रम संघ, श्री विनय आर्य, श्री नीरजजी आदि भी पूर्व में पहुंच गए व कार्यक्रम की सारी व्यवस्था की।  श्री शिव कुमार मदान, श्री एस. पी. सिंह जी भी उपस्थित थे।

19/11/2016 को महाशय धर्मपालजी अध्यक्ष दयानन्द सेवाश्रम, श्री दीनदयाल गुप्ता (नार्थ ईस्ट क्षेत्र), श्री शत्रुघ्जी, रांची (उपप्रधान), श्री धर्मपाल आर्य (प्रधान दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा) तथा अनेक आर्यजनों के साथ मैं भी वायुयान के साथ दीमापुर (नागालैण्ड) पहुंचे। एयर पोर्ट पर सैकड़ों की संख्या में स्थानीय पहनावे में जन समुदाय उपस्थित था। करीब 1 घण्टे तक वहां महाशय धर्मपालजी का स्वागत किया गया।

एयरपोर्ट से नागालैण्ड में स्थित बोकाजान पहुंचे, वहां सायंकालीन भोजन व कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हजारों  की संख्या में उपस्थित नागरिकों एवं विद्यालयों के छात्र छात्राओं, उनके पालकों की उपस्थिति में यह हुआ, तत्पश्चात् मंच से कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। बोकाजान में निर्मित भवन बहुत पुराना व जीर्ण स्थिति में है। सभी ने उस स्थान पर एक छात्रावास व विद्यालय की महती आवश्यकता बताते हुए उसके विस्तार व नवीनीकरण का महाशय धर्मपालजी से निवेदन कर सहयोग का प्रस्ताव रखा।

उदारमना, भामाशाह महाशय धर्मपाल जी ने अपनी उदारता व दानशील भावना का पुनः परिचय देते हुए एक बहुत सुन्दर भवन निर्माण का सहयोग देने की घोषणा की। यह भवन करोड़ों की लागत से बनेगा, पूरे क्षेत्र के विद्यार्थियों को इससे बहुत लाभ होगा, संस्कृति की रक्षा व विद्या की वृद्धि होगी।

दूसरे दिन प्रातः 9 बजे से धनश्री स्थित अति भव्य व विशाल विद्यालय भवन का जिसमें विद्यालय व छात्रावास दोनों का संचालन होगा उसका उद्घाटन होना था। साथ ही विराट जनजाति वैदिक सम्मेलन भी उसके पास ही दयानन्द सेवाश्रम की 160 बीघा जमीन पर आयोजित था। वहां विशाल पंडाल जिसमें 8 से 10 हजार व्यक्तियों की व्यवस्था थी, 100 ग् 40 फुट का  विशाल मंच बना था।

आर्य समाज के इस क्षेत्र को सबसे बड़ी देन है माता प्रेमलता जी के सहयोग से इस क्षेत्र में आपराधिक कार्य में लिप्त   अनेक व्यक्तियों ने इसी धनश्री के मैदान पर माताजी की उपस्थिति में शासन के समक्ष आत्म समर्पण किया था और अपने    शस्त्र आदि भी जमा कर दिए थे, उसके पश्चात् उन्होंने उस अपमानित जीवन को त्यागकर समाज सेवा व अन्य कार्यों में भाग लेना प्रारम्भ कर दिया। दल के प्रमुख श्री दिलीप मुनीषा एवं अमित मुनीषा। इस प्रकार 6 दलों ने सत्य मार्ग को अपनाया और आज वे आर्य समाज के सहयोगी हैं।

दीमापुर से ट्रेन द्वारा (दीमापुर से धनश्री का रास्ता अत्यन्त कष्टदायक उंचे-नीचे गड्ढ़ों वाला होने से) धनश्री रेल्वे स्टेशन पहुंचे।

वहां जो दृश्य था उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि क्षेत्र के पूरे आदिवासी ही कार्यक्रम में व महाशय धर्मपालजी के स्वागत के लिए एकत्रित हुए हैं, उनकी संख्या भी हजारों में थी। जब वहां से कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़े तो लगभग 100 नवयुवक मोटर साइकिल पर ओ३म् पताका लगाए जयघोष करते हुए आगे- आगे चल रहे थे।

ओ३म् ध्वज से सजी खुली जीप में मुझे बैठाया गया, साथ में सुरेश मलिक सहित और कार्यकर्ता थे, हमारे पश्चात् 15 से 20 कारें, पैदल, सायकिल व जिससे जैसे आते बना एक बड़ा जुलूस धनश्री रेल्वे स्टेषन से नवनिर्मित भवन तक (लगभग 2 किलोमीटर) नारे लगाते हुए चल रहा था। हर कोई बड़े आश्चर्य से इस भव्य शोभायात्रा को देखकर उसी वातावरण में रंग जाता, भारत माता की जय, वन्दे मातरम्, आर्य समाज के नारे लगाने लगता।

पूरे 2 किलोमीटर में सैकड़ों ओ३म् ध्वज बैनर महाशय जी के अभिनन्दन के फ्लेक्स, स्वागत द्वार लगे हुए थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे पूरा क्षेत्र आर्य समाज मय हो गया है।

महामहिम राज्यपाल श्री पी. बी. आचार्य, ठीक समय पर विद्यालय परिसर में पधारे। वहां यज्ञ में बैठकर आहुति दी व   भवन का उद्घाटन किया। फिर वहां से चलकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।

सर्वप्रथम सबका प्रान्त की व आदिवासी परम्परा के अनुसार स्वागत किया। कार्यक्रम में सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा मन्त्री की ओर से (मेरा) उद्बोधन, आर्य समाज, राज्यपाल महोदय का परिचय, तथा गतिविधियों पर हुआ। महाशय धर्मपालजी ने आशीर्वचन के साथ दो घोषणाएं और की। पहली घोषणा सत्र 2017 जो जनवरी से प्रारंभ होता है उसमें प्रवेश लेने वाले किसी भी छात्र से प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाएगा। दूसरी घोषणा विद्यालय में विद्यार्थियों को लाने ले जाने की सुविधा हेतु एक और स्कूल बस प्रारंभ की जाएगी।

इस घोषणा से उपस्थित हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिकों ने प्रसन्नता से ताली बजाकर महाशय धर्मपाल की जय के नारों से पण्डाल गुंजा दिया। श्री दीनदयाल जी गुप्ता तथा धर्मपालजी आर्य ने भी अपने उद्बोधन में पूर्ण सहयोग करने व दूसरों को भी आगे आने की अपील की।

महामहिम राज्यपाल श्री बनवारीलाल जी पुरोहित द्वारा अत्यन्त प्रभावी, सार्थक व मार्मिक उद्बोधन देते हुए आर्य समाज के कार्यों की महर्षि दयानन्द जी के प्रयास की प्रशंसा की। ऊंच-नींच के भेदभाव को समाप्त करने हेतु विद्या के प्रचार हेतु  कुरीतियों को नष्ट करने हेतु आर्य समाज का महत्त्व बताते हुए आप उसके प्रयासों की ओर आवश्यकता है, कहा। विद्या के  संस्कार व संस्कृति होना चाहिए। एक अच्छी शिक्षा ही धर्म, संस्कृति व राष्ट्र की रक्षा कर सकती है। यह जब इस विद्यालय में  होगा, ऐसा करना चाहिए यह एक बहुत बड़ा कार्य इस क्षेत्र में सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा दयानन्द सेवाश्रम आर्य समाज के द्वारा किया गया है, इस हेतु सबको धन्यवाद।

कार्यक्रम को स्थानीय विद्यालय व अन्य राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी संबोधित करते हुए सहयोग प्रदान करने की घोषणा की।

कार्यक्रम में उसी क्षेत्र के बालक- बालिकाओं द्वारा जिनमें से कुछ दिल्ली में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, सुन्दर नृत्य एवं नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसे देख अपार हर्ष का वातावरण बना। कार्यक्रम में बाहर से पधारे आर्यजनों का स्वागत किया व कार्यक्रम का संचालन श्री विनय आर्य, श्री जोगेन्दर खट्टर ने किया।

तीसरे दिन सुबह 10 बजे दीमापुर स्थित भवन (विद्यालय, छात्रावास) का पुनरोद्धार  हेतु शिलान्यास किया जाना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल श्री पी बी आचार्य के कर कमलों से हुआ। इसके पूर्व आपने सपत्नीक यज्ञ किया।

माननीय राज्यपाल सपत्नीक श्रीमती कविता आचार्या के साथ पधारे। साथ ही शिक्षा मन्त्री श्री यिटाचु, नागालैण्ड तथा अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी पधारे। प्रारम्भ में परम्परागत रूप से अतिथिगण का स्वागत किया।

कार्यक्रम में उद्बोधन हेतु मुझे आमन्त्रित किया गया। इसके पश्चात् अखिल भारतीय दययानन्द सेवाश्रम संघ नार्थ ईस्ट के प्रधान श्री दीनदयालजी गुप्ता ने भी अपनी बात कहते हुए सबके सहयोग से भवन बनाने की घोषणा की। यह भवन भी भव्य एवं विशाल बनेगा जिसमें दूर दराज ग्रामीण क्षेत्र के बालक रहेंगे व शिक्षा ग्रहण करेंगे।

इस अवसर पर दयानन्द सेवाश्रम संघ नॉर्थ ईस्ट के उप प्रधान श्री शत्रुघ्न लाल  आर्य ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।

राज्यपाल महोदय ने 40 मिनट के सारगर्भित सनातन संस्कृति के पोषक व्याख्यान ने सबको प्रभावित किया। आपने अपने उद्बोधन मानवीय विसंगतियों, भेदभाव की भावना को दूर करने, उसके सहायक बनने को कहा। समाज द्वारा अज्ञानतावश उपेक्षित समाज के उस वर्ग को साथ में जोड़ने से ही यह देश एक सुदृढ़ देश बनेगा।

अन्त में महाशय धर्मपालजी ने आशीर्वचन दिए। सफल संचालन श्री विनय आर्य ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय व बाहर से पधारे हजारों श्रोतागण दयानन्द सेवाश्रम के इस आयोजन को जहां सराह रहे थे वहीं सहयोग की भी भावना बन रही थी। उन्होंने इस छात्रावास व विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए एक मिनी बस प्रदान करने की घोषणा की। उपस्थित जन समूह ने अभिवादन किया।

कहते हैं सत्य पथ पर चलने वालों की और निष्काम कर्म करने वालों की परमात्मा पूर्ण सहायता करता है, वह इस कार्यक्रम में सिद्ध | वहां जाकर जब वहां की आवश्यकताओं को आर्यजनों ने देखा तो उस अभाव व अत्यन्त महत्त्वपूर्ण आवश्यकता को समझा। एक चेतना और प्रेरणा का संचार उनकी आत्मा में भी हुआ और सहयोग के लिए दिल खोलकर मुक्त हस्त से दान की घोषणाएं होने लगी।

श्री मनोज गुलाटी ने धनश्री में अपनी ओर से एक कन्या छात्रावास बनाने की घोषणा की। श्री रामकृष्ण जी तनेजा एवं धर्मपत्नी श्रीमती कृष्णा तनेजा ने भी एक छात्रावास बनाने की घोषणा की। श्रीमती अंजली कपूर ने एक लाख रुपया, श्री राजपाल पोपली व श्रीमती उर्मिला पोपली ने एक लाख रुपये,  श्रीमती आदर्श भसीन  ने एक लाख रुपये, श्रीमती सुधा गर्ग ने 51,000/- व जनकपुरी आर्य समाज सी ब्लाक की ओर से 11000/- रुपये , तथा अन्य अनेक महानुभावों ने सहयोग प्रदान करने घोषणा की।

समय दान की घोषणा: इस दान का अपना बहुत महत्त्व है इसके साथ-साथ कुछ घोषणा समय दान की भी की गई। इसमें वर्ष में किसी ने एक माह, किसी ने 15 दिन का समय देकर आदिवासी परिवारों से सम्पर्क बढ़ाने तथा विद्यार्थियों को  आकर शिक्षा व अन्य व्यावहारिक ज्ञान, सामान्य ज्ञान आदि देने की भावना से यहां रहेंगे।

धनश्री में निर्मित विशाल भवन में विद्यालय, छात्रावास, सुविधायुक्त अतिथिकक्ष निर्मित किए गए हैं। यह घोषणा इस क्षेत्र में वैदिक धर्म प्रचार प्रसार के लिए बहुत सार्थक सिद्ध होगी।

अन्य महानुभावों से एक निवेदन है हमें अपनी मिशनरी भावना को संजोना होगा। जो स्वस्थ है वहां जाकर अपने ज्ञान व  विचारों से इस मिशन के लिए सेवा करने का संकल्प लेकर अपनी अनूकूलता के अनुसार वहां के लिए समय देने की घोषणा करनी चाहिए। वहां उनके रहने, भोजन, आने-जाने की अच्छी व्यवस्था रहेगी। इस हेतु अपना समय दान संकल्प श्री जागेन्द्र खट्टर जी को (9810040982) पर अथवा आर्य समाज 15, हनुमान रोड, नई दिल्ली-110001 पर लिखित में भेज सकते हैं।

हिन्दू सेवा समिति दीमापुर की ओर से नगर में एक भव्य स्वागत समारोह दुर्गा मन्दिर में आयोजित किया गया था जिसमें मुख्य रूप से महाशय धर्मपाल जी का और साथ में अन्य आर्यजनों का भी स्वागत किया, सभी के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। अग्रवाल समाज, ब्राह्मण समाज, बंगाली समाज, आर एस एस के सदस्य, सिक्ख समाज आदि अनेक संस्थाओं द्वारा स्वागत किया गया तथा आर्य समाज के कार्य को सराहते हुए सहयोग की भावना व्यक्त की।

इस 3 दिवसीय आयोजन से नागा लैण्ड और असम को एक नई चेतना सनातन धर्मियों में संगठन, स्वधर्म के प्रति चेतना का प्रवाह हुआ। कोई कुछ भी कहे, कहता रहे, फोटो और समाचार पत्रों से छवि बनाने में लगा रहे, उन सबकी चिन्ता किए बिना ऋषि के कुछ-कुछ अनुयायी निरन्तर वैदिक धर्म पताका थामें अपने कत्र्तव्य का पालन कर रहे हैं।

विदेशों में होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन की हकीकत जानकर ही उनके आयोजन के महत्त्व को समझा जा सकता है। लगभग प्रत्येक देश में इन आयोजनों से एक ऊर्जा मिली है। संगठन बढ़ा है अपने देश के अतिरिक्त अन्य देशों के द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भी आना-जाना प्रारम्भ हुआ है। यह संगठन के लिए शुभ संकेत हैं।    

नेपाल जैसे देश में असंभव को संभव ही नहीं एक ऐतिहासिक कार्यक्रम बना कर आर्यों ने नया अध्याय जोड़ दिया, जिससे आर्य जगत के अतिरिक्त समस्त सनातन धर्मियों (हिन्दुओं) में नई चेतना आयी।

इसी प्रकार केरल में जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है, वेद प्रचारक प्रशिक्षण का वहां केन्द्र बनाकर बहुत बड़ा कार्य हुआ। विश्व स्तरीय वैदिक अनुसंधान व प्रशिक्षण की दृष्टि से करोड़ों की लागत से प्रारम्भ होने वाला प्रकल्प संगठन को वह गति देगा जिसके विकास की कल्पना आज हम कर रहे हैं।

निराशा के दौर से गुजरता संगठन एक उज्ज्वल प्रगतिशील उत्साह से पूर्ण पथ पर चलने लगा है। इसकी गति और सहयोग, सहारे, सद्भाव की आवश्यकता है कार्यकर्ता की जो इसके लिए समय दे रहे हैं, दान दे रहे हैं, उन्हें समस्त आर्यजनों के संबल, सुझाव व सहान

125th Maharshi Dayanand Saraswati Nirvan Utsav