Arya Parivar Holi Mangal Milan Samaroh

Arya Parivar Holi Mangal Milan Samaroh organised by Delhi Arya Pratinidhi Sabha

12 Mar 2017
India
Delhi Arya Pratinidhi Sabha

   होली परस्पर प्रेम, सौहार्द व खुशहाली का सन्देश फैलाने का त्यौहार है - महाशय धर्मपाल होली का त्योहार मनुष्य को अपनी ईर्ष्या द्विवेष तथा वैमनस्य को भुलाकर समानता और परस्पर प्रेम का दृष्टिकोण अपनाते हुए हंसी-खुशी एक दूसरे के गले मिलने और आपसी भाईचारे को बढ़ाने की प्रेरणा देता है। - धर्मपाल आर्य, प्रधान दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा 12 मार्च 2017 को रघुमल आर्य कन्या सीनियर सैकेन्ड्री स्कूल, राजा बाजार कनॉट प्लेस दिल्ली में आयोजित ‘आर्य परिवार होली मंगल मिलन’ समारोह में आर्य शिरोमणि महाशय धर्मपाल; चेयरमैन एम. डी. एच. ने हजारों आर्य जनों को होली पर शुभकामनाएं देते हुए कहा ‘‘होली परस्पर प्रेम, सौहार्द व खुशहाली का सन्देश फैलाने का त्यौहार है। मैं यहां आप सबको आशीर्वाद देता हूं और आप सब मुझे आशीर्वाद दें कि मैं इसी प्रकार होली पर हर वर्ष आता रहूं व आर्य समाज की सेवा में सदैव लगा रहूं।’’ 
 
   कार्यक्रम में सपरिवार पधारे दानवीर सेठ लाला रघुमल जी के नाती लाला दीवान चन्द ट्रस्ट के सचिव एवं पूर्व परिवहन मंत्री श्री राजेन्द्र गुप्ता एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रचना गुप्ता का दिल्ली सभा की ओर से स्मृति चिन्ह व पीतवस्त्र से स्वागत किया गया। अति विशिष्ठ अतिथि के रूप में पधारे श्रीमती खुशबू एवं श्री कुंवर सचदेव जी चेयरमैन सुकाम इण्डिया लिमिटेड का भी दिल्ली सभा के पदाधिकारियों द्वारा पीतवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
 
   श्री योगेश मुंजाल जी; मुंजाल शोवा लिमि., श्री आनन्द कुमार चौहान जी; एमिटी परिवार, श्री राकेश ग्रोवर जी; ग्रोवर संस लिमि. ने कार्यक्रम में पधार कर समारोह की शोभा में चार चाँद लगा दिये।
 
   समारोह का शुभारम्भ जयपुर से पधारे वैदिक विद्वान् आचार्य उर्षबुध जी के ब्रह्मत्व में पूर्ण वैदिक विधि विधान द्वारा नवसंस्येष्टि यज्ञ से हुआ। यज्ञ संयोजक श्री मदन मोहन सलूजा जी ने आचार्य उर्षबुध जी का फूलमाला से स्वागत किया तथा सभी यजमानों का परिचय कराया। यज्ञ में श्रीमती नीलम एवं यशपाल आर्य जी, डॉ. उमाशशि दुर्गा एवं श्री राजेन्द्र दुर्गा जी, श्रीमती मीनू सूद एवं श्री श्रीकान्त सूद जी, श्रीमती श्रुति एवं श्री अंकुर मखीजा जी, श्रीमती शिल्पा एवं श्री मनीष गोयल जी, श्रीमती शबनम एवं कै. अशोक गुलाटी जी, श्रीमती सुमेधा एवं श्री नितिन गुप्ता जी, श्रीमती नीतू एवं श्री संजीव मल्होत्रा जी मुख्य यजमान रहे। यज्ञोपरान्त आचार्य  उर्षबुध जी द्वारा सभी यजमानों को पुष्प वर्षा कर आशीर्वाद प्रदान किया गया व श्री वीरेन्द्र सरदाना, श्री योगेश आर्य, श्री सुरेन्द्र आर्य, श्री मदन मोहन सलूजा जी ने यज्ञ को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया। मंच संचालन  सभा महामंत्री श्री विनय आर्य द्वारा किया गया, कार्यक्रम की अध्यक्षता महाशय धर्मपाल जी ने की।
 
   कार्यक्रम के बीच-बीच में महामंत्री श्री विनय आर्य ने सभा की होने वाली गतिविधियों एवं आगामी योजनाओं से भी समस्त आर्य जनों को अवगत कराया, 1 व 2 अप्रैल को केरल में आयोजित होने वाले ‘महाशय धर्मपाल वेद रिसर्च फाउण्डेशन, कोझिकोड; केरल के नवनिर्मित परिसर के उद्घाटन एवं दक्षिण भारतीय वैदिक सम्मलेन’ में चलने के लिए आमन्त्रित किया। श्री विनय आर्य ने बताया कि ‘‘आर्य समाज के लिए महाशय धर्मपाल जी का योगदान अकथनीय है। महाशय जी के सहयोग से जिन राज्यों व देशों में आर्य समाज का नामोनिशान भी नहीं था वहां भी आज आर्य समाज का डंका बज रहा है और यह कार्य निरंतन निर्बाध गति से आगे भी चलता रहेगा।’’ दिल्ली सभा प्रधान श्री धर्मपाल आर्य जी ने सभी कार्यकर्त्ताओं दानीमहानुभावों, सहयोगियों, मातृशक्ति व बच्चों को कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘‘होली का पावन पर्व यह संदेश लाता है कि मनुष्य अपनी ईर्ष्या द्विवेष तथा वैमनस्य को भुलाकर समानता और परस्पर प्रेम का दृष्टिकोण अपनाते हुए हंसी-खुशी एक दूसरे के गले मिलने और आपसी भाईचारे को बढ़ाने की प्रेरणा देता है।’’ 
 
   होली के शुभ अवसर पर दिल्ली के विभिन्न आर्य समाजों, गुरुकुलों, शिक्षा केन्द्रों के बच्चों ने दिल को छू लेने वाली प्रस्तुतियां पेश की। कन्यागुरुकुल सैनिक विहार, गुरु विरजानन्द संस्कृत कुलम् हरीनगर, वैदिक शिक्षा केन्द्र प्रीत विहार, आर्य पब्लिक स्कूल राजा बाजार, आर्य पब्लिक स्कूल श्रीनिवासपुरी, रतनचन्द आर्य पब्लिक स्कूल, सरोजनी नगर, आर्यवीर दल, आर्यवीरांगना दल प्रीत विहार, आर्य समाज मंगोलपुरी एवं रघुमल आर्य सी. सै. स्कूल, राजा बाजार द्वारा सेठ लाला रघुमल जी के जीवन पर आधारित नाटिका प्रस्तुत की। सेठ लाला रघुमल जी पर आधारित नाटिका को प्रस्तुत करने में श्रीमती तृप्ता शर्मा एवं श्रीमती वीना आर्या जी का विशेष सहयोग रहा। दिल्ली सभा की ओर से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी समारोह में उपस्थित सबसे बुजुर्ग एवं सबसे छोटे बच्चे व नवविवाहित दम्पत्ति को सम्मानित करने की परम्परा को निभाते हुए 99 वर्षीय श्री टी. डी. चावला जी को, 3 माह 4 दिन के बालक यजुर आर्य एवं 5 दिन पूर्व दाम्पत्यसूत्र बंधन में बंधे नवदम्पत्ति आर्य समाज सागरपुर के मंत्री श्री मान्धाता सिंह जी के पुत्र श्री राघवेन्द्र सिंह व पुत्रवधू श्रीमती सलोनी सिंह जी को महाशय धर्मपाल जी के करकमलों द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया उक्त कार्य श्री शिव कुमार मदान उपप्रधान दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा को सौंपा गया था। ब्र. राजसिंह आर्य स्मृति सम्मान से आचार्य भद्रकाम वर्णी जी एवं कुंवर सचदेवा जी को सम्मानित किया गया। हरियाणा सभा प्रधान मा. रामपाल जी, श्री आनन्द कुमार पूर्व आई.पी. एस., योगेश मुंजाल जी, हास्य कवि राजीव चेतन जी, हरियाणा सभा उपप्रधान श्री कन्हैया लाल जी, को श्री सुरेन्द्र कुमार रैली द्वारा स्मृति चिन्ह व पीतवस्त्र से सम्मानित किया गया। 
 
   कार्यक्रम में पधारे अन्तर्राष्ट्रीय कवि श्री राजीव चेतन जी ने अपने मुक्तकों, चुटकुलों एवं रसभरी कविताओं से हजारों की संख्या में बैठे जनमानस को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर दिया। बर्मा से पधारे श्री ओम प्रकाश एवं दीन बन्धु को महाशय जी द्वारा सम्मानित किया गया और श्री विनय आर्य जी ने 2017 में बर्मा  ;म्यामार मेंं होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में चलने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अन्त में ईनामी कूपन का ड्रा महाशय जी द्वारा किया गया जिसमें प्रथम पुरस्कार वेदों का सैट श्री प्रेम सिंह व द्वितीय पुरस्कार तांबे का हवन कुंड का सैट श्री सूजन को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में सर्वश्री एस.पी.सिंह, ओम प्रकाश भटनागर, अशोक कुमार, वीरेन्द्र सरदाना, श्रीमती वीना आर्या, श्रीमती तृप्ता आर्या इत्यादि की विशेष भूमिका रही। ‘होली सो हो ली भुला दो उसे...’ के सुमधुर गीत के साथ रंगबिरंगे पुष्पों की वर्षा करते हुए उपस्थित पदाधिकारियों एवं महाशय जी के साथ समस्त जनमानस ने जमकर होली खेली व नृत्य किया। शांतिपाठ व प्रीतिभोज के साथ कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। रिपोर्ट तैयार करते हुए यदि किसी महानुभाव का नाम लिखने से रह गया हो उसके लिए लेखक क्षमा प्रार्थी है।

 

94th Birth Anniversary of Mahashay Dhrampal Ji

Ved Katha