143rd Arya Samaj Sthapana Diwas

143rd Arya Samaj Sthapana Diwas organised by Arya Kendriya Sabha Delhi Rajya

     आर्य केन्द्रीय सभा के तत्त्वावधान में 28 मार्च 2017 प्रात: 8.30  आर्य समाज का 143वां आर्य समाज स्थापना दिवस डॉ. ऋषिपाल शास्त्री जी के निर्देशन में यज्ञ द्वारा आरम्भ हुआ जिसके यज्ञमान, श्रीमती संध्या व श्री नीरज आर्य, श्रीमती सुषमा व श्री वीरेन्द्र सरदाना, श्रीमती हर्ष व श्री ईश नांरग तथा श्रीमती सवित्री व श्री हीरा लाल चावला, कु. स्नेहा व प्रिया आर्य ने बड़ी श्रद्धा व भक्ति भाव द्वारा वेदमन्त्रों से नव वर्ष और आर्यसमाज स्थापना दिवस के पावन अवसर पर वेद मन्त्रों द्वारा प्रभु का गुणगान करते हुये उपस्थित आर्य बन्धुओं का आशीर्वाद और शुभकामनायें प्राप्त कीं।

लगभग 10 बजे श्री सत्पाल भरारा जी, चैयरमैन महर्षि दयानन्द जन कल्याण ट्रस्ट, श्री धर्मपाल आर्य, श्री सत्यानन्द आर्य, श्री सुरेन्द्र कुमार रैली, श्री मदनमोहन सलूजा, श्री विद्यामित्र ठुकराल, श्री विनय आर्य, श्री विक्रम नरुला, श्री अजय सहगल, श्रीमती उषा किरण, श्री प्रकाश आर्य व श्री शिव कुमार मदान के साथ मिल कर दीप प्रज्ज्वलित किया। आर्य जगत के सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक श्री जगत वर्मा जी ने मधुर, सुन्दर, मनमोहक प्रेरणा पद प्रभु भक्ति से युक्त महर्षि दयानन्द द्वारा किये कार्यों व देश भक्ति पूर्ण भजनों द्वारा आर्यजनों का मन मोह लिया। आर्य गरुकुल तिहाड़ गॉव के ब्रह्मचारियों द्वारा सामूहिक गीत प्रस्तुत किया जिसे गुरुकुल में ही लिखा गया था और एक संगीतमय स्तूप का मंचन किया। महर्षि दयानन्द पब्लिक स्कूल, शादीखामपुर के बच्चों ने ‘आर्यसमाज विचार धारा’ विषय पर मनमोहक नाटिका की प्रस्तुति दी। 

सार्वजनिक सभा की अध्यक्षता सभा प्रधान, महर्षि के दानवीर अनन्य भक्त, आर्यनेता महाशय धर्मपाल जी ने कहा कि आर्य समाज एक प्रवाहमान आन्दोलन है जो सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वासों, आडम्बरों के लिए संघर्षरत है। आज समाज व राष्ट्र में पुनः संगठित होकर वेद विद्या प्रचार की आवश्यकता है। 

    श्री सुरेन्द्र कुमार रैली ने राष्ट्र व समाज हित हेतु संगठन सूक्त के महत्त्व व उसके कार्यान्वयन की अति आवश्यकता पर सभी का ध्यान आकर्षित किया तथा अपने अनुभव बाँटते हुए बताया कि बुराइयों से बचते हुये भविष्य को सुन्दर बनाना है। आर्य समाज को सकारात्मक कार्यां से आगे बढ़ाया जाना चाहिए जो भी राष्ट्रीय नेता या सरकारें, किसी भी राजनीतिक दल से हों, उनको सामूहिक प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

      आर्ष विद्या सभा के अन्तर्गत आने वाले विभिन्न विद्यालयों व गुरुकुलों के विद्यार्थियों ने, जिन्होंने ऋषि मेले 24 फरवरी 2017 पर खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिया था, उन्हें प्रमाण पत्र तथा पुरस्कार 97 विद्याथियों को प्रदान किये गये। इन खेल प्रतियोगितओं में महर्षि दयानन्द पब्लिक स्कूल, आर्यसमाज शादीखामपुर प्रथम स्थान, दयानन्द आदर्श विद्यालय, आर्यसमाज तिलक नगर, द्वितीय स्थान तथा आर्यसमाज सी3 पंखा रोड तृतीय स्थान के अधिकारियों ने सामूहिक पुरस्कार स्मृति चिह्न सहित प्रदान किये गये।

     आर्य नेता व समाजसेवी श्री सत्यानन्द आर्य जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि ‘आजादी के समय आर्य समाज के 85 प्रतिशत आर्य अनुयायियों ने बलिदान दिये तथा प्रथम लोक सभा में इतने ही प्रतिशत से सांसद चुने गये। आज स्थिति अलग है लेकिन अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा यदि हम आज नववर्ष के अवसर पर यह प्रयास करें कि युवाओं को सुसंस्कृत किया जाना चाहिए तथा आर्य विचारधारा में लाने का पुरजोर प्रयास हो। 

   श्री आनन्द कुमार चौहान, एमिटी विश्वविद्यालय ने कहा कि ‘‘वर्तमान परिवेश में आर्य समाज के कार्या को अत्याधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाना चाहिए। श्री विनय आर्य , महामंत्री दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा ने कहा कि ‘सृष्टि के आरम्भ से वैदिक संस्कारों का श्रेष्ठ समाज रहा, महाभारत काल में परस्पर फूट व अशिक्षा, अंधकार से समाज दिग्भ्रमित हो गया जिसके फलस्वरूप समाज सुधारक महर्षि दयानन्द सरस्वती ने वैदिक विचारधारा के अनुरूप आर्य समाज की स्थापना कर देश व मानव हित के लिए एक अभियान चलाया। हमें हर सम्भव अपने आर्य समाजों की कार्य पद्दति को आधुनिक बनाते हुए यह प्रयास करना चाहिए कि हम-

1. साप्ताहिक सत्संगमें संख्या बढ़ाएं, 

2 अपनी आर्य समाज के भवनों में सारा दिन जन कल्याण हेतु कुछ न कुछ कार्य होते रहने चाहिए, 

3. अपने सदस्यों की संख्या बढ़ाएं तथा 

4. महर्षि द्वारा दिखाए मार्ग पर चलते हुए यज्ञ को हर घर तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए।

    आचार्य सन्तोष शास्त्री जी एवं आचार्य दयासागर जी जोकि नागालैण्ड से विशेष रूप से इस कार्यक्रम में भाग लेने  आये थे दोनों ही वैदिक विद्वानों ने अपने सहयोगियों के साथ अखिल भारतीय दयानन्द सेवाश्रम संघ के अन्तर्गत उन पिछड़े क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं जहा ईसाईयत व इस्लामियत भोली भाली व मासूम जनता को बहकावे में लाकर ईसाई व मुसलमान बना रही है वहां विद्या के प्रचार-प्रसार द्वारा न केवल उपरोक्त कार्यों को रोक रहे हैं बल्कि महर्षि देव दयानन्द द्वारा दिखाये जन कल्याण कार्यों को बढ़ा रहे हैं और वहां के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में विद्या द्वारा प्रगति कराई जा रही है।

   सतीश चड्डा महामंत्री ने मंच संयोजन करते हुए आर्य सदस्यों को जानकारी दी कि वह दिन दूर नहीं जब वैदिक संस्कृति  के अनुरूप विश्व उसी राह पर चलेगा जो वेद ज्ञान द्वारा प्रकट होते हैं क्योंकि वेदों के एक अंग योग को आज विश्व ने मान लिया है। पर्यावरण की शुद्ध हेतु शीघ्र ही यज्ञ को भी यह सम्मान मिलेगा क्योंकि यज्ञ पर हुए शोध अनुसंधानों से यह सिद्ध हो गया है कि यज्ञ एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा पर्यावरण को शुद्ध व सामान्य बनाया जा सकता है जोकि मनुष्य जाति के लिए आवश्यक है। आज पश्चिम के वैज्ञानिक भी शोध द्वारा यह मानने लग गये हैं कि सूर्य की लपटों से जो ध्वनि निकल रही है वह भी ओ३म्, ओ३म्, ओ३म्...... ही है। यह सिद्ध करता है कि वेदों में लिखी वाणी सत्य व सार्वभौमिक है।’  इस अवसर पर श्री धीरज घईई सुपुत्र श्री वीरेन्द्र कुमार घईई आर्य कार्यकर्त्ता स्मृति पुरस्कार से श्री मामचन्द रिवाड़िया सुपुत्र श्री भौंड़ेराम रिवाड़िया को सम्मानित किया गया। श्री हरिओम बसंल जी के विशेष योगदान व कार्यों हेतु सहपरिवार सम्मान करते हुए स्मृति चिह्न प्रदान किया गया। सभी दानदाताओं ने श्रद्धाभाव से यथा शक्ति सात्विक दान दिया। हम प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि उनके सात्विक धन में वृद्धि हो और वह हमें शुभ कार्यों हेतु प्रोत्साहित करते रहें।

 

आर्य कार्यकर्त्ताओं जिनकी सेवाओं से यह कार्यक्रम सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ उन में विशेष कर श्री योगेश आर्य, श्री अरविन्द नागपाल, श्री राजेन्द्रपाल आर्य, श्री ओम प्रकाश आर्य, श्री जोगेन्द्र खट्टर, श्री कंवरभान खेत्रपाल, श्री राजेन्द्र दुर्गा,  श्री अरुण प्रकाश वर्मा, श्री एस. पी. सिंह़,  श्री नीरज आर्य, श्री सन्दीप आर्य, श्रीमती वीना आर्या, श्रीमती नीरज मैदीरत्ता तथा एस. एम. आर्य पब्लिक स्कूल पश्चिम पंजाबी बाग की सभी अध्यापिकाओं व अधिकारियों का गुरुकुल तिहाड़ के ब्रह्मचारिओं का हार्दिक धन्यवाद करते हैं। इस कार्यक्रम में विभिन्न आर्यसमाजों के अधिकारी व सदस्यों ने आकर धर्म लाभ प्राप्त किया तथा हमें प्रोत्साहित भी किया, उनका हार्दिक धन्यवाद।

शान्तिपाठ के साथ यह उत्सव बड़े ही उल्लासपूर्वक सम्पन्न हुआ।

-सतीश चड्डा

 

Dakshin Bharat Vedic Mahasammelan

94th Birth Anniversary of Mahashay Dhrampal Ji