Kashi Mahasammelan - Day 2

Second Day report of Swarn Shatabdi Vaidik Dharn Mahasammelan organised by Sarvadeshik Arya Pratinidhi Sabha & Arya Pratinidhi Sabha Uttar Pradesh

महर्षि दयानंद सरस्वती के प्रसिद्ध काशी शास्त्रार्थ की 150 वी वर्षगांठ के उपलक्ष्य पर आयोजित तीन दिवसीय स्वर्ण शताब्दी वैदिक धर्म महासम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न नाटक नाटिकाओं के मंचन के साथ आर्य समाज के सन्यासियों वैदिक वक्ताओं के नाम रहा. 
उल्लेखनीय है 11 से 13 अक्टूबर काशी के नारिया में आर्य समाज आर्य समाज द्वारा अंतर्राष्ट्रीय तीन दिवसीय स्वर्ण शताब्दी वैदिक धर्म महासम्मेलन आयोजित किया जा रहा है दूसरे दिन के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान के सीकर से भाजपा सांसद स्वामी सुमेधानंद रहे. इस अवसर पर मंच से वैदिक सन्यासियों एवं वैदिक विदुषियों का अभिभाषण हुआ. मंच से सांसद स्वामी सुमेधानंद ने आर्य समाज द्वारा किये गये कार्यों को गिनाते हुए कहा कि हमारी परम्पराए, संस्कृति क्या थी, हमारे वेद क्या थे स्वामी दयानंद ने इनका सबका ज्ञान अपने शास्त्रार्थ में काशी के मठाधीशों को कराया था. वर्ष 2025 में हम स्वामी दयानंद सरस्वती की 200 वीं जयंती मनाएंगे स्वामी दयानंद सरस्वती ने जाति, आस्था और वर्ग आधारित सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है तथा उन्होंने सबको आर्य बनने यानी सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए प्रेरित किया है. हमारा यह कर्तव्य है कि हम स्वामी दयानंद सरस्वती के कार्यों को आगे बढ़ाएं.
शास्त्रार्थ परम्परा पर प्रकाश डालते हुए कन्या गुरुकुल द्रोणस्थली देहरादून से पधारी आचार्य अनपूर्णा ने कहा कि शास्त्रार्थ परम्परा हमें वेदों से मिली है राजा जनक से लेकर बहुत पहले राजाओं- महाराजाओं के राज्य में शास्त्रार्थ हुआ करता था. हजारों वर्षों बाद पुन: स्वामी दयानन्द ने इस परम्परा को जीवित रखा. 
हजारों लोगों की उपस्थिति में खचाखच भरे पंडाल में देश की अनेकों आर्य संस्थाओं से पधारे वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आर्य समाज की लगभग हजारों इकाईयां पूरी दुनिया में कल्याणकारी गतिविधियां चला रही हैं. विशेषकर भारत के आदिवासी आंचलों में आज कन्याओं और वंचित वर्गों की उन्नति के लिए काम कर रहा है. इस अवसर पर एमडीएच के चेयरमैन तथा पदमभूषण से सम्मानित महाशय धर्मपाल गुलाटी ने कहा कि आप सब राष्ट्र कल्याण और आर्य समाज का कार्य कर रहे है इससे मेरी आत्मा प्रसन्न हो जाती है. एक समय वो था जब हम अपनी संस्कृति और आस्था को पश्चिमी संस्कृति के सामने कमतर समझते थे, तब स्वामी दयानंद सरस्वती ने हमें आत्मसम्मान और पुनर्जागरण का मार्ग दिखाया. इस सम्मेलन में भारत भर के अलावा बांग्लादेश और नेपाल से भी आर्य समाज से जुड़े विद्वानों एवं लोग भाग ले रहे है.. अंतिम दिन रविवार को काशी में विशाल शोभायात्रा का आयोजन भी आर्य समाज द्वारा किया जायेगा. इस अवसर पर आर्य समाज संगठन की सर्वोच्च संस्था सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान सुरेशचन्द्र आर्य ने कहा कि इस सम्मेलन की सफलता से उत्साहित बड़ी संख्या में आर्यजन काशी पहुँच रहे है जो कल शोभायात्रा में शामिल होंगे.

Kashi Mahasammelan - Day 3 - Shobhayatra

Rishi Smriti Sammelan