फलित जयोतिष पाखंड मातर हैं


Author
Dr. Vivek AryaDate
12-Oct-2014Category
लेखLanguage
HindiTotal Views
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SaurabhUpload Date
13-Oct-2014Download PDF
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जयोतिष के नाम पर विà¤à¤¿à¤¨à¤¨ परकार के परपंच समाज में देखने को मिलते हैं। पराचीन काल में गणित जयोतिष का परचार था जिसका समबनध विà¤à¤¿à¤¨à¤¨ गरहों के परिà¤à¤°à¤®à¤£, मौसम आदि में परिवरतन, सूरय-चनदरमा आदि के उदय-असत से समबंधित था। यह पूरण रूप से वैजञानिक वं यकतिसंगत था। कालांतर में फलित जयोतिष परसिदद हो गया। फलित जयोतिष का सिदधांत गरह चकरों आदि दवारा वयकति के à¤à¤¾à¤—य पर पड़ना वं उसके नकारातमक परà¤à¤¾à¤µ से बचाव के लि करम कांड, अनषठान आदि को परधानता देना था। इस सिदधांत के चलते लोग धरम à¤à¥€à¤° हो ग वं वेद विदित करम फल सिदधांत को à¤à¥‚लकर अपने साथ हो रही किसी à¤à¥€ अपरिय घटना का शरेय गृहदशा को देने लग ग। उसके पशचात इस कपित दशा के निराकरण के लि न न विधानो का सहारा लिया जाने लगा जिसकी परिणीति अनधविशवास के रूप में होती हैं।
क पराचीन घटना यहा पर देनी उपयोगी रहेगी। क राजा ने जयोतिषी के कहने पर अपने बाग़ में क पौधा लगवाया। जयोतिषी का कहना था की जब तक यह पौधा हराà¤à¤°à¤¾ रहेगा तब तक आपका राजय उननति करेगा। सयोग से उस पौधे की देखà¤à¤¾à¤² कर रहा माली अपने गांव चला गया और अपने परिचित क यवक को बाग़ की देखà¤à¤¾à¤² के लि छोड़ गया। उस पौधे को कछ टेा लगा देखकर उस यवक ने उसका सथान परिवरतन कर दिया जिससे वह पौधा सख गया। राजा को जैसे ही का मालूम चला उनहोंने उस यवक को पराणदंड की आजञा दे दी। यवक से उसकी अंतिम इचछा पूछी गई तो उसने उस जयोतिषी को बलाने का निवेदन किया। उस जयोतिषी से उस यवक ने पूछा आप इतने बड़े राजय के à¤à¤µà¤¿à¤·à¤¯ को जानने की योगयता रखते हैं परनत आपकी विदया यह कयों नहीं बता सकी कि आपकी à¤à¤µà¤¿à¤·à¤¯à¤µà¤¾à¤£à¥€ कारण क बेचारा गरीब फांसी पर च जायेगा। जयोतिषी निरततर होकर वापिस आ गया।
सी ही क और घटना कागड़ा के परसिदद धनी ठाकर के गृह की हैं। उनके घर पर वरषों के पशचात क बालक का जनम हआ। उस बालक की कंडली बनाई गई। जयोतिषी के कंडली देखकर कहा की बालक का मख देखने से गृहसवामी को मृतय का योग हैं। सà¤à¥€ चिंतागरसत हो ग। आखिर में बालक को माता पिता से अलग कर घर के गवाले को सौप दिया गया। आठवरष की आय तक बालक अनप रहा वं बकरियां चराना मातर सीख सका। संयोग से लाहौर से क आरयसमाजी परचारक वहां पर आये। उनहें जब इस विचछेद का परिचय हआ तो उनहोंने उस बालक को लाहौर ले जाकर शिकषित करने की घरवालों से आजञा मांगी। à¤à¤°à¥‡ मन से बालक को बिना मख देखे विदा कर दिया गया। अपनी शिकषा पूरण कर वह बालक जिसे दरà¤à¤¾à¤—यशाली समा गया था à¤à¤¾à¤°à¤¤ के परथम नयायाधीश जसटिस मेहरचंद महाजन के नाम से परसिदद हआ। धनय हैं उन परचारक का अनयथा जयोतिषी के चलते वह जीवन à¤à¤° बकरियां ही चराते रहते। वैसे आज à¤à¥€ दिये तले अधेरे की कहावत देखने को मिलती हैं। दसरो का à¤à¤µà¤¿à¤·à¤¯ बताने वाले आश à¤à¤¾à¤ˆ जयोतिषाचारय के यहा से 50 लाख रूप की चोरी हो गई। आप लोगों को किसी à¤à¥€ परकार की विपतति अथवा कठिनाई न आये अथवा कोई कठिनाई आ जाये तो उससे निपटने का समाधान बताते हैं।
आप जाने कयों अपनी जयोतिष विदया से अपने ऊपर आने वाली विपतति का पता न लगा सके और चोरों ढूंढने के लि आपको पलिस की सहायता लेनी पड़ी। जिन दो वयकतियों पर चोरी का अंदेशा था वे दोनों तीन वरष से आश à¤à¤¾à¤ˆ के पास करमचारी के रूप में रह रहे थे। जब उनको आश à¤à¤¾à¤ˆ ने नौकरी पर रखा तो उनकी जनम पतरी देख कर आश à¤à¤¾à¤ˆ यह कयू नहीं जान पा की यह à¤à¤µà¤¿à¤·à¤¯ में उनहीं के यहा पर चोरी करेगे? इस परकार से अनेक उदहारण हमें देखने को मिलते हैं जहा पर जयोतिषी अपनी समसयाओं का सवयं समाधान नहीं निकाल पाते और अनय लोगों की समसयायों का समाधान करने का à¤à¤¾à¤°à¥€ à¤à¤°à¤•à¤® दावा करते हैं।
आखिर कयों à¤à¤¾à¤°à¤¤ का क à¤à¥€ जयोतिषी यह नहीं बता पाया की उततराखंड में पराकृतिक आपदा में हज़ारों निरदोष लोगों को अपने पराण गवाने पड़ेंगे? आखिर कयों क à¤à¥€ जयोतिषी टरैन आदि की टककर के विषय में कà¤à¥€ नहीं बता पाता जिससे लोगों की पराण रकषा हो सके। तलाक, गृह कलेश, मारपीट, आपसी मतà¤à¥‡à¤¦, नशे आदि की लत उन वैवाहिक संबंधों में à¤à¥€ सामानय रूप से देखने को कयों मिलती हैं जिनके माता-पिता सवयं जयोतिषी होते हैं और कंडलियों के पूरण मिलान के पशचात ही वे विवाह करते और कराते हैं। जयोतिष विदया पाखंड मातर हैं। निरधन वयकति परिशरम करने के सथान पर शॉरटकट से धनी बनने के चककर में इस पाखंड का शिकार बनता हैं जबकि धनी वयकति उसका धन कहीं चला न जाये इस à¤à¤°à¤® से फलित जयोतिष का सहारा लेता हैं।
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