योग ही रोग का नाशक है


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Vikas AryaDate
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Vikas KumarUpload Date
12-Mar-2019Download PDF
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योग का मà¥à¤–à¥à¤¯ उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ चितà¥à¤¤ की à¤à¤•à¤¾à¤—à¥à¤°à¤¤à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आतà¥à¤®à¤¿à¤• मानसिक तथा बौधिक शकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का विकास करना और आतà¥à¤® साकà¥à¤·à¤¾à¤¤ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ परम आतà¥à¤®à¤¾ तक पहà¥à¤‚चाना है किंतॠजो बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ तथा आतà¥à¤®à¤¾ का निवास सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है जो परमातà¥à¤®à¤¾ का साकà¥à¤·à¤¾à¤¤ मनà¥à¤¦à¤¿à¤° है वह हमारा शरीर यदि बलवान और सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ नहीं है तो हम अपनी शकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का विकास नहीं कर सकते हैं और ना ही अपने आतà¥à¤®à¤¸à¥à¤µà¤°à¥‚प का साकà¥à¤·à¤¾à¤¤ परम आतà¥à¤®à¤¾ परमेशà¥à¤µà¤° का दरà¥à¤¶à¤¨ आरà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की धरà¥à¤® पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• वेद में à¤à¤•à¥à¤¤ à¤à¤—वान से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करते हैं।
“सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¥ˆà¤°à¤‚गैसà¥à¤¤à¥à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤µà¤¾à¤‚स:”
हे पà¥à¤°à¤à¥ हम सà¥à¤§à¤¾à¤° तथा बलवान अंगों से तेरी सà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ करने वाले हैं अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® विदà¥à¤¯à¤¾ की मà¥à¤–à¥à¤¯ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• उपनिषद à¤à¥€ बिना शारीरिक बल के आतà¥à¤®à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ असंà¤à¤µ ही बताती है जैसा कि उपनिषदों में कहा है -
नायमातà¥à¤®à¤¾ बलहीनेनलà¤à¥à¤¯à¤ƒà¥¤
अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ यह आतà¥à¤®à¤¾ बल हीना कमजोर मनà¥à¤·à¥à¤¯ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं होता है अतः योग जहां आतà¥à¤®à¤¿à¤• मानसिक तथा à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ का उपाय बताता है, वहां शारीरिक उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ का à¤à¥€ सरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® तथा अचूक उपाय हमारे सामने रखता है।
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ तथा बलवान शरीर ही सांसारिक सà¥à¤– समृदà¥à¤§à¤¿ का मà¥à¤–à¥à¤¯ साधन है
मनà¥à¤·à¥à¤¯-जीवन का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ अपने को सà¥à¤–मय तथा शकà¥à¤¤à¤¿ संपनà¥à¤¨ बनाना है इस उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ की पूरà¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ तà¤à¥€ हो सकती है जबकि हमारे शरीर निरोग तथा सबल हो। इस शरीर की महतà¥à¤¤à¤¾ का विदà¥à¤µà¤œà¥à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ ने इन शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में गà¥à¤£à¤¾à¤¨à¥à¤µà¤¾à¤¦ गाया है।
आयतनं सरà¥à¤µà¤‚ विदà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¤¾à¤‚ मूलं धरà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤•à¤¾à¤®à¤®à¥‹à¤•à¥à¤·à¤¾à¤£à¤¾à¤®à¥à¥¤
पà¥à¤°à¥‡à¤¯à¤ƒ किमनà¥à¤¯à¤¤à¥ शरीरमजरामरं विहायैकमà¥à¥¤à¥¤
अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ जो शरीर समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ विदà¥à¤¯à¤¾à¤“ं तथा शà¥à¤ गà¥à¤£à¥‹à¤‚ का आधार है, जो धरà¥à¤®, अरà¥à¤¥, काम और मोकà¥à¤· -पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ का मूल कारण है, उस शरीर को मनà¥à¤·à¥à¤¯ तो सैदव अजर, अमर चाहता हैं
अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ चिरायॠअवसà¥à¤¥à¤¾ से अधिक पà¥à¤°à¤¿à¤¯ वसà¥à¤¤à¥ संसार में मनà¥à¤·à¥à¤¯ के लिठऔर कà¥à¤¯à¤¾ होगी।
आज पà¥à¤°à¤à¥ की अमूलà¥à¤¯ देन की दयनीय दशा को देख कर बहà¥à¤¤ दà¥à¤– होता है आज सà¤à¥à¤¯ संसार इस शरीर की अनेक पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° की आधि-वà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से आकà¥à¤°à¤¾à¤‚त हो रहा है समà¥à¤à¤µà¤¤: कोई à¤à¤¸à¤¾ सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ पà¥à¤°à¥à¤· होगा कि जिसको किसी न किसी पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° की आधि तथा वà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने घेर रखा हो। जठरागà¥à¤¨à¤¿ की कमजोरी (अपचन), बदà¥à¤§à¤•à¥‹à¤·à¥à¤ ता (कबà¥à¤œ), का कबाब रकà¥à¤¤ दोष सिर दरà¥à¤¦ जà¥à¤–ाम सà¥à¤µà¤ªà¤¨à¤¦à¥‹à¤· पà¥à¤°à¤®à¥‡à¤¹ में ही धातà¥à¤•à¥à¤·à¥€à¤£à¤¤à¤¾ आदि बीमारियां तो सरà¥à¤µà¤¸à¤¾à¤§à¤¾à¤°à¤£ बनती जा रही है आज सà¤à¥à¤¯ जगत का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• पà¥à¤°à¥à¤· उपयà¥à¤•à¥à¤¤ किसी न किसी वà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿ से अवशà¥à¤¯ आकà¥à¤°à¤¾à¤‚त है यदि कोई सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤µà¤¶ शारीरिक वà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿ से मà¥à¤•à¥à¤¤ है तो उसे मानसिक वà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿ ने सता रखा है। इसलिठआज हमारे शरीरों में तथा मनों में न बल है न उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹, न पावितà¥à¤°à¥à¤¯ है और न पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾à¥¤
जीवन की छोटी से छोटी घटनाà¤à¤‚ तथा परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ हमारे निरà¥à¤¬à¤² तथा निसà¥à¤¤à¥‡à¤œ शरीर तथा मन को विकà¥à¤·à¥à¤¬à¥à¤§ और अशानà¥à¤¤ बना देती है। हमारे सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ का आनंद को à¤à¥€ नषà¥à¤Ÿ कर हमें शोक सागर में डूबा देती है संसार का कोई ही शायद सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ मनà¥à¤·à¥à¤¯ होगा कि जिसको किसी ने किसी शोक या चिंता ने सता रखा हो इन सब आदि वà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण हमारी शारीरिक तथा मानसिक निरà¥à¤®à¤²à¤¤à¤¾ और असà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¤à¤¾ ही है और उसमें à¤à¥€ विशेष कर शारीरिक निरà¥à¤¬à¤²à¤¤à¤¾ जिस मनà¥à¤·à¥à¤¯ का शरीर सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और बलवान नहीं वह कà¤à¥€ à¤à¥€ मानसिक चिंता हो तथा शारीरिक वà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से मà¥à¤•à¥à¤¤ नहीं हो सकता है।
उसके पास सांसारिक सà¥à¤– à¤à¥‹à¤— की सब सामगà¥à¤°à¥€ होते हà¥à¤ à¤à¥€ ना तो वह उसे सà¥à¤µà¥‡à¤šà¥à¤›à¤¾ पूरà¥à¤µà¤• à¤à¥‹à¤— सकता है और ना ही उसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤– और शांति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकता है उसे कोई न कोई मानसिक चिंता या शारीरिक बीमारी अवशà¥à¤¯ घेरे रहती है कमजोर शरीर वाले के मन में न तो किसी à¤à¥€ कारà¥à¤¯ को करने का उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ होता है और ना उमंग, उसका जीवन सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• शांति तथा आनंद से शूनà¥à¤¯ सदा नीरस शà¥à¤·à¥à¤• बना रहता है हमारे पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ आचारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ ने सà¥à¤–ी जीवन के जो लकà¥à¤·à¤£ बताà¤à¤‚ हैं आज हम में से शायद ही कोई सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ होगा जिसमें यह सारे के सारे लकà¥à¤·à¤£ सरà¥à¤µà¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¨à¤¾ विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ हो।
महरà¥à¤·à¤¿ चरक गà¥à¤°à¤‚थ में सà¥à¤–ी जीवन के लकà¥à¤·à¤£ बताते हà¥à¤ लिखते हैं
जिस मनà¥à¤·à¥à¤¯ को शारीरिक व मानसिक रोग नहीं सताते जो विशेषकर यौवनावसà¥à¤¥à¤¾ में सब पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° के शारीरिक व मानसिक विकारों से रहित है जिसका बल वीरà¥à¤¯ यश पौरà¥à¤· और पराकà¥à¤°à¤® उसकी सामरà¥à¤¥à¥à¤¯ तथा इचà¥à¤›à¤¾ के अनà¥à¤°à¥‚प है जिसका शरीर नाना पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° की कला कौशल आदि विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने में समरà¥à¤¥ है जिसकी इनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ बलवान और इंदà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤œà¤¨à¥à¤¯ à¤à¥‹à¤—ो के à¤à¥‹à¤—ने में समरà¥à¤¥ है जिसके शरीर में किसी पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° की निरà¥à¤¬à¤²à¤¤à¤¾ नहीं उसका जीवन ही वासà¥à¤¤à¤µ में सà¥à¤–ी जीवन है अतः जिसके शरीर में उपयà¥à¤•à¥à¤¤ नहीं है वह कà¤à¥€ सà¥à¤–ी जीवन नहीं कहला सकता à¤à¤¸à¥‡ नीरस उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¹à¥€à¤¨ जीवन से ना तो इहलोक सà¥à¤§à¤° सकता है और न ही परलोक अत: इस लोक और परलोक को शांति तथा सà¥à¤–मय बनाने का यदि कोई मà¥à¤–à¥à¤¯ साधन है तो वह है शारीरिक आरोगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ इसलिठशरीर शासà¥à¤¤à¥à¤° के आचारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ ने कहा है।
धरà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤•à¤¾à¤®à¤®à¥‹à¤•à¥à¤·à¤¾à¤£à¤¾à¤®à¤¾à¤°à¥‹à¤—à¥à¤¯à¤‚ मूलमà¥à¤¤à¥à¤¤à¤®à¤®à¥à¥¤à¥¤
अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ - धरà¥à¤® अरà¥à¤¥ काम और मोकà¥à¤· जो कि मानव जीवन रूपी कलà¥à¤ªà¤µà¥ƒà¤•à¥à¤· के चार मधà¥à¤° फल है उनका यदि कोई शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ ता तथा मà¥à¤–à¥à¤¯ साधन है तो वह शारीरिक आरोगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ ही है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यदि हमारा शरीर सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और बलवानॠहै तो हम अपने पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ से धन à¤à¥€ कमा सकते हैं, उस धन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सांसारिक सà¥à¤–ों का उपयोग à¤à¥€ कर सकते हैं और परोपकार, देश, जाति तथा धरà¥à¤® की सेवा तथा आतà¥à¤® चिंतन और पà¥à¤°à¤à¥-à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ आदि शà¥à¤ कारà¥à¤¯ à¤à¥€ कर सकते हैं। इसलिठमहापà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ ने कहा है-
“शरीरमादà¥à¤¯à¤‚ खलॠधरà¥à¤®-साधनम॔
अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ - अपने जीवन को धारà¥à¤®à¤¿à¤• तथा सà¥à¤–मय बनाने का सबसे पà¥à¤°à¤¥à¤® और मà¥à¤–à¥à¤¯ साधन सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ तथा बलवान शरीर ही है। इसलिठहमारे आचारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ ने सà¤à¥€ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर बहà¥à¤¤ बल दिया है महरà¥à¤·à¤¿ चरक तो यहां तक लिखते हैं –
सरà¥à¤µà¤®à¤¨à¥à¤¯à¤¤à¥ परितà¥à¤¯à¤œà¥à¤¯ शरीरमनà¥à¤ªà¤¾à¤²à¤¯à¥‡à¤¤à¥à¥¤
तदà¤à¤¾à¤µà¥‡ हि à¤à¤¾à¤µà¤¾à¤¨à¤¾à¤‚ सरà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤ƒ शरीरिणामà¥à¥¤à¥¤
अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ - मनà¥à¤·à¥à¤¯ अनà¥à¤¯ सब काम छोड़कर पहले अपने शरीर की ओर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अनà¥à¤¯ सब धन, संपतà¥à¤¤à¤¿ आदि पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ तथा सà¥à¤– साधनों के होने पर à¤à¥€ शरीर सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के बिना वह सब नहीं के समान है।
--विकास आरà¥à¤¯ (वैदिक वाटिका से चà¥à¤¨à¥‡à¤‚ पà¥à¤·à¥à¤ª)
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