वेद आरà¥à¤¯à¤¸à¤®à¤¾à¤œ और गणतनà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€

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Manmohan Kumar AryaDate
26-Jan-2016Language
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UmeshUpload Date
28-Jan-2016Download PDF
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à¤à¤¾à¤°à¤¤ का इतिहास उतना ही पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ है जितना की इस सृषà¥à¤Ÿà¤¿ के बनने के बाद पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ जगत व मानव उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ के बाद का सृषà¥à¤Ÿà¤¿ का इतिहास। सà¤à¥€ मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ को नियम में रखने व सà¤à¥€ शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ आचरण करने वाले मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ को अचà¥à¤›à¤¾ à¤à¤¯à¤®à¥à¤•à¥à¤¤ व सदà¥à¤œà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤ªà¥‚रà¥à¤£ वैदिक परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤“ं के अनà¥à¤°à¥à¤ª वातावरण देने के लिठà¤à¤• आदरà¥à¤¶ राजवà¥à¤¯à¤µà¤µà¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾ की आवशà¥à¤¯à¤•à¤¤à¤¾ à¤à¤µà¤‚ उपयोगिता सà¥à¤µà¤¯à¤‚सिदà¥à¤§ है। वैदिक मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इस सृषà¥à¤Ÿà¤¿ में मानव उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ का इतिहास 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख 53 हजार 115 वरà¥à¤· पूरà¥à¤µ आरमà¥à¤ होकर वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ समय तक चला आया है। 15 अगसà¥à¤¤, 1947 को अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ की दासता से सà¥à¤µà¤¤à¤¨à¥à¤¤à¥à¤° होने से पूरà¥à¤µ à¤à¥€ इस देश में अगणित राजा हà¥à¤ जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने देश पर राज किया और राजà¥à¤¯ के संचालन के लिठउनके अपने संविधान, नियम व सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤ à¤à¥€ रहे हैं। वैदिक साहितà¥à¤¯ का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ करने पर जà¥à¤žà¤¾à¤¤ होता है कि महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ काल व उसके बाद के à¤à¤¾à¤°à¤¤ के आरà¥à¤¯ राजाओं के संविधान वेद समà¥à¤®à¤¤ नियमों व पà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª रहित मनà¥à¤¸à¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ के विधान हà¥à¤† करते थे। अà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¥‹à¤¦à¤¯ से पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ समय से लगà¤à¤— 5,200 वरà¥à¤· पूरà¥à¤µ महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ का विनाशकारी यà¥à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤† जिसमें लाखों की संखà¥à¤¯à¤¾ में लोग मारे गये। इस यà¥à¤¦à¥à¤§ के परिणामसà¥à¤µà¤°à¥à¤ª देश की शैकà¥à¤·à¤¿à¤•, सामाजिक व पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ पर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥‚ल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ा जिससे जà¥à¤žà¤¾à¤¨ व विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ का हà¥à¤°à¤¾à¤¸ होकर समाज में अनà¥à¤§à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸, सामाजिक विषमता व लोगों का चारितà¥à¤°à¤¿à¤• पतन आदि देखने को मिलता है। इन कारणों से देश पहले मà¥à¤—लों वा यवनों का और उसके बाद अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ का दास बन गया। मà¥à¤—लों व अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ की दासता के समय में à¤à¥€ अनेक आरà¥à¤¯ वा हिनà¥à¤¦à¥‚ राजाओं ने विदेशी विधरà¥à¤®à¥€ शासकों का पà¥à¤°à¤œà¥‹à¤° विरोध किया। महाराणा पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª, वीर शिवाजी, गà¥à¤°à¥ गोविनà¥à¤¦ सिंह जी आदि हमारे à¤à¤¸à¥‡ ही पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ में थे जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने देश की सà¥à¤µà¤¤à¤¨à¥à¤¤à¥à¤°à¤¤à¤¾ व सà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ के लिठअपना उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय योगदान किया।
वेद व वैदिक जà¥à¤žà¤¾à¤¨ सतà¥à¤¯ व नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ पर आधारित राजà¥à¤¯ का समरà¥à¤¥à¤• व पोषक है। वेदों ने मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ को यह बताया है कि इस जगत में ईशà¥à¤µà¤°, जीव व पà¥à¤°à¤•à¥ƒà¤¤à¤¿ यह तीन मà¥à¤–à¥à¤¯ व पà¥à¤°à¤®à¥à¤– ततà¥à¤µ हैं। ईशà¥à¤µà¤° व जीव चेतन ततà¥à¤µ वा पदारà¥à¤¥ हैं तथा पà¥à¤°à¤•à¥ƒà¤¤à¤¿ इनके विपरीत जड़ है। ईशà¥à¤µà¤° निराकार, सरà¥à¤µà¤µà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• व सरà¥à¤µà¤œà¥à¤ž है तथा जीव अलà¥à¤ªà¤œà¥à¤ž, à¤à¤•à¤¦à¥‡à¤¶à¥€ व ससीम है। ईशà¥à¤µà¤° सृषà¥à¤Ÿà¤¿ का निमितà¥à¤¤ कारण तथा पà¥à¤°à¤•à¥ƒà¤¤à¤¿ उपादान कारण है। जीव संखà¥à¤¯à¤¾ में अननà¥à¤¤ हैं व ईशà¥à¤µà¤° केवल à¤à¤•à¤®à¤¾à¤¤à¥à¤° व केवल à¤à¤• सतà¥à¤¤à¤¾ है। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ जीवों के पूरà¥à¤µà¤œà¤¨à¥à¤® के करà¥à¤®à¥‹à¤‚ के फल रूपी सà¥à¤– व दà¥à¤ƒà¤– के à¤à¥‹à¤— के लिठईशà¥à¤µà¤° ने इस सृषà¥à¤Ÿà¤¿ को बनाया है जिससे कि ईशà¥à¤µà¤° की सामथà¥à¤°à¥à¤¯ का उपयोग हो सके और जीवों को मानव आदि शरीरों की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के साथ करà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° सà¥à¤– व दà¥à¤ƒà¤– मिल सके। मनà¥à¤·à¥à¤¯ जीवन का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ पूरà¥à¤µ जनà¥à¤®à¥‹à¤‚ के अवशिषà¥à¤Ÿ करà¥à¤®à¥‹à¤‚ के फलों का à¤à¥‹à¤— करते हà¥à¤ ईशà¥à¤µà¤° की सà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿, पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ व उपासना व सà¤à¥€ वेद विहित करà¥à¤®à¥‹à¤‚ को करना जिससे दà¥à¤ƒà¤–ों की पूरà¥à¤£à¤¤à¤¯à¤¾ निवृति होकर मोकà¥à¤· की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ हो सके। मनà¥à¤·à¥à¤¯ वा उसकी जीवातà¥à¤®à¤¾ को मोकà¥à¤· वैदिक जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ कर उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° निषà¥à¤•à¤¾à¤® व फलों की इचà¥à¤›à¤¾ से रहित सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के हितकारी करà¥à¤®à¥‹à¤‚ के आचरण सहित ईशà¥à¤µà¤° की उपासना से समाधि को सिदà¥à¤§ करने अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ ईशà¥à¤µà¤° का साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤•à¤¾à¤° करने पर पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है। समाज में अपराध से मà¥à¤•à¥à¤¤ वातावरण हो, लोगों को उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ के अवसर मिलें, नागरिक सà¥à¤–ी व समृदà¥à¤§ हों तथा राजà¥à¤¯ विदेशी शतà¥à¤°à¥à¤“ं से सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहे, à¤à¤¸à¥‡ अनेक पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के लिठराजà¥à¤¯ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की जाती है। इस दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से रामराजà¥à¤¯ अब तक हà¥à¤ सà¤à¥€ राजाओं व राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ राजà¥à¤¯ था। सजà¥à¤œà¤¨ पà¥à¤°à¥à¤· तो अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ में रहते ही हैं परनà¥à¤¤à¥ दà¥à¤·à¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ व अपराध पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ के सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ व पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ में रखने के लिठकठोर दणà¥à¤¡ का पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤¨ आवशà¥à¤¯à¤• है। न केवल दणà¥à¤¡ का पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤¨ ही अपितॠà¤à¤¸à¥€ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ होनी चाहिये कि जिसमें कोई अपराधी बिना दणà¥à¤¡ के बच न सके। सà¤à¥€ अपराधियों को उनके अपराध के अनà¥à¤°à¥à¤ª कठोर दणà¥à¤¡ देकर ही समाज को अपराधमà¥à¤•à¥à¤¤ किया जा सकता है। दणà¥à¤¡ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के पूरà¥à¤£ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ होने के साथ देश के सà¤à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€-पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ व उनके बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठà¤à¤• समान, सबके लिठअनिवारà¥à¤¯, निःशà¥à¤²à¥à¤• व आदरà¥à¤¶ वैदिक शिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ होनी चाहिये जिससे सà¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ व नागरिकों को अचà¥à¤›à¥‡ संसà¥à¤•à¤¾à¤° मिले। आजकल की हमारे देश की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में यह उतà¥à¤¤à¤® बातें नहीं हैं। अतः यह कहना व मानना पड़ता है कि वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में अनेक खामियां है जिनके सà¥à¤§à¤¾à¤° की आवशà¥à¤¯à¤•à¤¤à¤¾ है।
वेद कà¥à¤¯à¤¾ हैं, यह à¤à¥€ जानना आवशà¥à¤¯à¤• है। वेद ईशà¥à¤µà¤° पà¥à¤°à¤¦à¤¤à¥à¤¤ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ है जो सृषà¥à¤Ÿà¤¿ के आरमà¥à¤ में उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ में चार ऋषि अगà¥à¤¨à¤¿, वायà¥, आदितà¥à¤¯ व अंगिरा को ईशà¥à¤µà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इन ऋषियों की आतà¥à¤®à¤¾ में पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया गया था। इस जà¥à¤žà¤¾à¤¨ से ही संसार की पà¥à¤°à¤¥à¤® पीढ़ी के मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ का तिबà¥à¤¬à¤¤ में जीवन निरà¥à¤®à¤¾à¤£ हà¥à¤† और नई पीढि़यों ने जनà¥à¤® लेकर न केवल जनसंखà¥à¤¯à¤¾ की वृदà¥à¤§à¤¿ की अपितॠजनसंखà¥à¤¯à¤¾ वृदà¥à¤§à¤¿ व कà¥à¤› लोगों के यायावरी सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ के कारण यह सारा संसार वेदानà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ आरà¥à¤¯à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बसाया गया। महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ काल तक वैदिक नियमों व इनके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बनाये गये ऋषियों के विधानों के आधार पर आरà¥à¤¯ राजाओं ने संसार पर शासन किया। रामायण, महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ à¤à¤µà¤‚ महरà¥à¤·à¤¿ दयाननà¥à¤¦ के गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ आदि इसके पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ हैं। महरà¥à¤·à¤¿ दयाननà¥à¤¦ ने चारों वेदों का गमà¥à¤à¥€à¤° अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ करके इसको पूरà¥à¤£à¤¤à¤¯à¤¾ सतà¥à¤¯ व निà¤à¥à¤°à¥à¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¤ पाया था और इसकी पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤•à¤¤à¤¾ को तरà¥à¤• व यà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से सिदà¥à¤§ किया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ऋगà¥à¤µà¥‡à¤¦ का आंशिक à¤à¤µà¤‚ यजà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ का संसà¥à¤•à¥ƒà¤¤ व हिनà¥à¤¦à¥€ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में à¤à¤¾à¤·à¥à¤¯ à¤à¥€ किया है। वेदों में देश के संचालन के लिठसामà¥à¤ªà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• व मजहबी बातों से रहित शà¥à¤¦à¥à¤§ सतà¥à¤¯ व नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ पर आधारित विधान दिये गये है जो à¤à¤¾à¤°à¤¤ सहित संसार के सà¤à¥€ देशों के लिठमाननीय हैं। वेदों से दूर जाने के कारण ही अतीत में à¤à¤¾à¤°à¤¤ की दà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ हà¥à¤ˆ और आज संसार में सरà¥à¤µà¤¤à¥à¤° जो अशानà¥à¤¤à¤¿, à¤à¤¯, हिंसा व अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ का वातावरण है उसका पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण à¤à¥€ संसार का वेदों से दूर जाना है।
महरà¥à¤·à¤¿ दयाननà¥à¤¦ ने 10 अपà¥à¤°à¥ˆà¤², 1875 को वेदों के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° व पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° हेतॠमà¥à¤®à¥à¤¬à¤ˆ में आरà¥à¤¯à¤¸à¤®à¤¾à¤œ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की थी। अजà¥à¤žà¤¾à¤¨, अनà¥à¤§à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸, पकà¥à¤·à¤ªà¤¾à¤¤-अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯-अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤°-शोषण-असमानता आदि को दूर कर संसार में वेदानà¥à¤°à¥à¤ª ईशà¥à¤µà¤° की सचà¥à¤šà¥€ पूजा, परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ की शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ सहित सà¤à¥€ नागरिकों को सदà¥à¤œà¥à¤žà¤¾à¤¨ व शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ संसà¥à¤•à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ से संयà¥à¤•à¥à¤¤ करना उनका मà¥à¤–à¥à¤¯ उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ था। इस उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ की पूरà¥à¤¤à¤¿ के लिठउनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने व उनके आरà¥à¤¯à¤¸à¤®à¤¾à¤œ के अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने जो पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ किया है, वह इतिहास के पनà¥à¤¨à¥‹à¤‚ पर सà¥à¤µà¤°à¥à¤£à¤¿à¤® अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ में अंकित है। उनके विचारों, मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं व सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¥‹à¤‚ का सारे संसार पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ा परनà¥à¤¤à¥ बहà¥à¤¤ सी बातें लोगों की अलà¥à¤ªà¤œà¥à¤žà¤¤à¤¾, अजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¤à¤¾, सà¥à¤µà¤¹à¤¿à¤¤ आदि अनेक कारणों से आज à¤à¥€ बनी हà¥à¤ˆ हैं। इसके लिठआरà¥à¤¯à¤¸à¤®à¤¾à¤œ को अपने गà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤²à¥‹à¤‚ में वेदों के आधà¥à¤¨à¤¿à¤• विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ तैयार करने चाहिये जो न केवल संसार की सà¤à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• वैदिक समाधान दे सकें अपितॠविशà¥à¤µ में वेदों का अपूरà¥à¤µ रीति से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° à¤à¥€ करें जिससे कि à¤à¤• ईशà¥à¤µà¤°, à¤à¤• विचारधारा, à¤à¤• सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤ व मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾, अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯-शोषण-हिंसा रहित समाज का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ किया जा सके। यही आरà¥à¤¯à¤¸à¤®à¤¾à¤œ का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯, परमà¥à¤ªà¤°à¤¾, कारà¥à¤¯ व पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° की दिशा है।
हमारे देश में गणतनà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ है जो कि अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ है। अनेक पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ à¤à¤¸à¥‡ à¤à¥€ हैं जिनका दà¥à¤°à¥à¤ªà¤¯à¥‹à¤— किया जाता है जिससे समाज में सामाजिक व आरà¥à¤¥à¤¿à¤• असमानता अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• बढ़ गई है। इस देश में à¤à¤¸à¥‡ à¤à¥€ लोग हैं जिनको रात दिन काम करने के बाद à¤à¥€ न à¤à¤° पेट à¤à¥‹à¤œà¤¨ मिलता है, अचà¥à¤›à¥‡ वसà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚, निजी घर, उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ की तो बात ही कà¥à¤¯à¤¾ है? गणतनà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ में सबको à¤à¤• समान, निःशà¥à¤²à¥à¤• व अनिवारà¥à¤¯ शिकà¥à¤·à¤¾ का पà¥à¤°à¤¬à¤¨à¥à¤§ होना चाहिये। बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤šà¤°à¥à¤¯ व संयम पूरà¥à¤£ जीवन की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा होनी चाहिये। मांसाहार, धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨, मदिरापान व नशा आदि पूरà¥à¤£ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ होने चाहिये। गोहतà¥à¤¯à¤¾ पर पूरà¥à¤£ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¨à¥à¤§ ही न हो अपितॠगोसंवरà¥à¤§à¤¨ के लिठअनà¥à¤¸à¤‚धान केनà¥à¤¦à¥à¤°à¥‹à¤‚ सहित गोपालन को पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ किया जाना चाहिये जिससे देश में दà¥à¤—à¥à¤§ व दà¥à¤—à¥à¤§ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ पà¥à¤°à¤šà¥à¤°à¤¤à¤¾ से सरà¥à¤µà¤¸à¥à¤²à¤ हो सकें। गाय सहित सà¤à¥€ पशà¥à¤“ं के मांसाहारारà¥à¤¥ वध पर पूरà¥à¤£ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¨à¥à¤§ ही न हो अपितॠà¤à¤¸à¤¾ करने वालों को दणà¥à¤¡à¤¿à¤¤ à¤à¥€ किया जाना चाहिये। पशà¥à¤“ं की हतà¥à¤¯à¤¾ हिंसातà¥à¤®à¤• कारà¥à¤¯ है और यह अमानवीय वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° है। हम समà¤à¤¤à¥‡ हैं धरà¥à¤® सदगà¥à¤£à¥‹à¤‚ को धारण करने व उनके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° करने को कहते हैं, अतः कोई à¤à¥€ धरà¥à¤® अकारण व à¤à¥‹à¤œà¤¨à¤¾à¤°à¥à¤¥ पशॠकी हतà¥à¤¯à¤¾ की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ नहीं दे सकता। सारे देश में सरकार की ओर वेदों की अनिवारà¥à¤¯ शिकà¥à¤·à¤¾ की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ à¤à¥€ होनी चहिये। सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¼à¤¯à¥‹à¤‚ का आदर व समà¥à¤®à¤¾à¤¨ होना चाहिये और सà¤à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€-पà¥à¤°à¥à¤· नागरिकों को वैदिक संसà¥à¤•à¥ƒà¤¤à¤¿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° आचरण-वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° करने सहित आदरà¥à¤¶ वेशà¤à¥‚षा को धारण करना चाहिये। जनà¥à¤®à¤¨à¤¾ जातिवाद पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ हो व पूरà¥à¤£à¤¤à¤¯à¤¾ समापà¥à¤¤ हों। दलितों व पिछड़ों को शिकà¥à¤·à¤¾ में विशेष सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤¯à¥‡à¤‚ मिलनी चाहिये जिसका आधार उनकी सामाजिक व आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ होनी चाहिये। समाज में कोई दलित व पिछड़ा हो ही न अपितॠसà¤à¥€ सामाजिक व आरà¥à¤¥à¤¿à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿ उनà¥à¤¨à¤¤ हो और सà¤à¥€ में परसà¥à¤ªà¤° पà¥à¤°à¥‡à¤® व à¤à¤¾à¤¤à¥ƒà¤à¤¾à¤µ विकसित अवसà¥à¤¥à¤¾ में होना चाहिये। असतà¥à¤¯ आचरण, अपरिगà¥à¤°à¤¹ व सचà¥à¤šà¤°à¤¿à¤¤à¥à¤°à¤¤à¤¾ को सामाजिक जीवन में अधिक महतà¥à¤µ दिया जाना चाहिये और इसके विपरीत की उपेकà¥à¤·à¤¾ होनी चाहिये। समाज में आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•à¤¤à¤¾ का विकास व विसà¥à¤¤à¤¾à¤° और सामà¥à¤ªà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• विचारधारा पर अंकà¥à¤¶ व पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¨à¥à¤§ होना चाहिये। जब यह व à¤à¤¸à¥‡ सà¤à¥€ लकà¥à¤·à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो जायेंगे तà¤à¥€ हमारी गणतनà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ सफल मानी जा सकती है। कà¥à¤¯à¤¾ हम गणतनà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ के आदरà¥à¤¶ इन उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯à¥‹à¤‚ की पूरà¥à¤¤à¤¿ के लिठकाम कर रहें हैं, इस पर हमें आज के दिन विचार करना चाहिये। इन सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨à¥‹à¤‚ पर विचार करना व इनका हल ढूढंना ही गणतनà¥à¤¤à¥à¤° दिवस को मनाना हमें पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ होता है। इसी के साथ हम इस लेख को विराम देते हैं।
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