पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ का सच


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Rajeev ChoudharyDate
19-Feb-2016Language
HindiTotal Views
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SaurabhUpload Date
19-Feb-2016Download PDF
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पà¥à¤°à¤¾à¤£ में कà¥à¤¯à¤¾ सच है कà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥‚ठ, यह पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ सिरà¥à¤« सà¥à¤µà¥€à¤•à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ और नकारने के लिठनहीं विषय आतà¥à¤®à¤®à¤‚थन का à¤à¥€ है और अब में कहता इनकी समीकà¥à¤·à¤¾ जरूरी है खेर à¤à¤• कहानी सà¥à¤¨à¤¾ रहा हूठकहानी २००० वरà¥à¤· पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ है” हजारों वरà¥à¤· पहले उजà¥à¤œà¤¯à¤¿à¤¨à¥€ नगरी में à¤à¤• बगीचा था, जिसमे इलाके के नामी à¤à¥‚ठे,धूरà¥à¤¤ रोज बैठकर गपà¥à¤ªà¥‡ लड़ाते थे | उनके मà¥à¤–à¥à¤¯ कथाकार चार थे, शश,à¤à¤²à¤¾à¤·à¤¾à¤¢, मà¥à¤²à¤¦à¥‡à¤µ और महा धà¥à¤°à¥à¤¤à¤¨à¥€ खंडपाणा| à¤à¤• बार जब बारिश के लगातार सात दिन तक छाठरहे तो सà¤à¥€ को कसकर à¤à¥‚ख लगी थी| सवाल उठा खाने की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ कौन करे? मूलदेव ने कहा कि à¤à¤•-à¤à¤• कर सà¤à¥€ धूरà¥à¤¤ समागम में अपने साथ घटी घटना का अविशà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥€à¤¯ लगने वाला किसà¥à¤¸à¤¾ सà¥à¤¨à¤¾à¤à¤‚गे चूà¤à¤•à¤¿ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ की कथाओं की पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤•à¤¤à¤¾ सरà¥à¤µà¤®à¤¾à¤¨à¥à¤¯ है इसलिठअगर उनके हवाले से कही कथा सही साबित कर दी गयी तो अविशà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥€ जन चारों को खाना खिलाà¤à¤‚गे | हाà¤, यदि कथा इन महाकावà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की कसौटी पर सच साबित नहीं हà¥à¤ˆ तो कथावाचक खाने का à¤à¥à¤—तान करेंगे|
पहली कथा कही à¤à¤²à¤¾à¤·à¤¾à¤¢ ने- “à¤à¤• बार में गाये चराने जा रहा था तो सामने डाकू आते दिखे| मैंने तà¥à¤°à¤‚त अपना कंबल उतारकर गायों को उसमे लपेटा और गठरी पीठपर रख गाà¤à¤µ वापस आ गया| वही डाकू गाà¤à¤µ में आ पहà¥à¤‚चे | तà¥à¤°à¤‚त में, मेरी गायें, गà¥à¤°à¤¾à¤®à¤µà¤¾à¤¸à¥€ सब à¤à¤• ककड़ी में घà¥à¤¸ गये जो à¤à¤• बकरी ने खा ली| बकरी को à¤à¤• अजगर निगल गया और उस अजगर को à¤à¤• बगà¥à¤²à¤¾ खाकर à¤à¤• पेड़ पर जा बैठा, जहाठसे उसकी à¤à¤• टांग नीचे लटकती रही| पेड़ तले à¤à¤• राजा उसका हाथी और सेना विशà¥à¤°à¤¾à¤® कर रहे थे| राजा का हाथी बगà¥à¤²à¥‡ की टांग में उलठगया बगà¥à¤²à¤¾ उसे लेकर उड़ने लगा तो राजा ने शोर मचाया तीरंदाज़ आये बगà¥à¤²à¥‡ को मार गिराया | जब बगà¥à¤²à¥‡ का पेट फटा तो उसमे से हम सब बाहर निकले बाकि लोग तो गाà¤à¤µ चले गठमै गायें बाà¤à¤§ कर इधर चला आया | अब आप लोग कहे कहानी सचà¥à¤šà¥€ है?” बाकि धूरà¥à¤¤à¥‹ ने कहा à¤à¤•à¤¦à¤® सचà¥à¤šà¥€, हमारे पà¥à¤°à¤¾à¤£ बताते है कि पà¥à¤°à¤•à¥ƒà¤¤à¤¿ के आरमà¥à¤ में बस समà¥à¤¨à¥à¤¦à¥à¤° था जिसमें तैरते à¤à¤• सà¥à¤¨à¤¹à¤°à¥‡ अंडे के à¤à¥€à¤¤à¤° यह सारी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ चराचर जीव जंतà¥, पेड़ पहाड़ समाये हà¥à¤ थे तो फिर कंबल और ककड़ी में तà¥à¤® सब समा गये तो अचरज कैसा? बगà¥à¤²à¥‡ के पेट में अजगर उसके पेट में बकरी उसके अनà¥à¤¦à¤° ककड़ी और तà¥à¤® सब का होना पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° सही है | उनका कहना है कि यह सारी चराचर सà¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ विषà¥à¤£à¥ के à¤à¥€à¤¤à¤° विषà¥à¤£à¥ कृषà¥à¤£ के रूप में देवकी के गरà¥à¤ में और देवकी कारावास में ननà¥à¤¹à¥€ सी खाट पर समाई हà¥à¤ˆ है |
अब शश ने कहानी शà¥à¤°à¥‚ की- “मै अपने तिल की खेती को देखने रात को खेत पर गया तिल के पोधे इतने बड़े हो गये थे कि मै उनको कà¥à¤²à¥à¤¹à¤¾à¥œà¥€ से काटने लगा| तà¤à¥€ à¤à¤• हाथी आया और में तिल के पेड़ पर चॠगया| हाथी पेड़ की परिकà¥à¤°à¤®à¤¾ करते हà¥à¤ पेड़ को à¤à¤•à¤à¥‹à¤°à¤¤à¤¾ रहा| जमीन तिलों से ढक गयी हाथी के पैरो से कà¥à¤šà¤²à¥‡ तिलों से कà¥à¤› समय बाद तेल की à¤à¤¸à¥€ वेगवान नदी निकली की हाथी फंसकर मर गया में नीचे उतरा, उसकी खाल उतारी और मशक बनाकर उसमे तेल à¤à¤° लिया फिर मैने कोई दस घड़े तेल पिया और गाà¤à¤µ आकर मशक को पेड़ पर टांग दिया कà¥à¤› देर बाद मैंने अपने पà¥à¤¤à¥à¤° को मशक लाने à¤à¥‡à¤œà¤¾ जब उसे ना दिखी तो वो समूचा पेड़ ही फाड़ उखाड़ लाया फिर में घà¥à¤®à¤¨à¥‡ निकला और यहाठआ पहà¥à¤‚चा| कहिये सच है या नही?” à¤à¤• दम सतà¥à¤¯ है सà¤à¥€ धूरà¥à¤¤à¥‹ ने à¤à¤• सà¥à¤µà¤° में कहा| महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ रामायण और अनेक शà¥à¤°à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ उलà¥à¤²à¥‡à¤– है कि हाथियों के मद बिनà¥à¤¦à¥à¤“ं से वनोवन à¤à¤¾ ले जाने वाली नदियाठनिकल सकती है जड़ी लाने के आदेश पर रामायण में हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ à¤à¥€ तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पेड़ उखाड़ बेटे की तरह परà¥à¤µà¤¤ उखाड़ लाये थे |
इसके बाद मà¥à¤²à¤¦à¥‡à¤µ ने अपना किसà¥à¤¸à¤¾ सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾- “à¤à¤• बार मैने गंगा को शिरोधारà¥à¤¯ करने की सोची| छतà¥à¤° कमंडल लेकर अपने सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ के घर जाने लगा तो à¤à¤• हाथी पीछा करने लगा| में कमंडल की टोंटी से उसके अनà¥à¤¦à¤° पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कर गया पर उसकी के अनà¥à¤¦à¤° हाथी à¤à¥€ घà¥à¤¸ आया 6 माह तक मà¥à¤à¥‡ परेशान करता रहा अंतत में फिर टोंटी से निकल à¤à¤¾à¤—ा हाथी की दà¥à¤® टोंटी में उलà¤à¥€ रह गयी फिर में गंगा के अथाह जल को चीरता पार हà¥à¤† 6 माह तक बिना खाये पिठउसके किनारे रहा फिर यहाठआ गया| कहिये सच कि à¤à¥‚ठ?” सौ फीसदी सच जब शासà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ है कि किस तरह बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾ के नाना अंगो में समाठबैठे सारी जातियों के लोग बाहर निकले थे सो आप और हाथी à¤à¤• कमंडल में समायें होंगे इसमें कैसा शक? विषà¥à¤£à¥ जगत के करà¥à¤¤à¤¾ हà¥à¤ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾ उनके उदर से निकले और आज तक तप कर रहे है पर उनके कमल की नाल विषà¥à¤£à¥ की नाà¤à¤¿ में अटकी रही बेचारा हाथी à¤à¥€ पूंछ से अटक गया होगा और तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ गंगा को पर करना हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ के समà¥à¤‚दà¥à¤° को पार करने जैसा है |
अब खंडपाणा की बारी आई- “मै राजा के धोबी की बेटी के साथ अपने à¤à¤• हजार नौकरों और पिता सहित à¤à¤• à¤à¥ˆà¤¸à¤—ाडी में धà¥à¤²à¤¾à¤ˆ लेकर गंगा तट पर गयी कपडे सà¥à¤–ाते हà¥à¤ à¤à¤¾à¤°à¥€ आंधी आई मेरे पिता, कपडे, नौकर सब गायब हो गये राजकोप के डर से मै गिरगिट बन जंगल में छिप गयी कà¥à¤› समय बाद मà¥à¤¨à¤¾à¤¦à¥€ सà¥à¤¨à¥€ की राजा ने सबको माफ़ कर दिया बाहर आई तो पिता मिले गाड़ी तो नहीं मिली पर à¤à¥‡à¤‚से की पूंछ और उसमे लिपटी मीलो लमà¥à¤¬à¥€ रसà¥à¤¸à¥€ मिल गयी कहो सच कि à¤à¥‚ठ?” सच है सà¤à¥€ धूरà¥à¤¤ हà¤à¤¸à¥‡ जब बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾ विषà¥à¤£à¥ को शिवलिंग की गहराई ना मिली तो तब तà¥à¤®à¤•à¥‹ अंधड़ में अपने साथी कैसे मिलते रही बात पूछ की तो हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ की पूछ याद करो| रà¥à¤•à¥‹ अà¤à¥€ कथा बाकि है मितà¥à¤°à¥‹ खंडपाणा बोली | मेरे अनà¥à¤¸à¤¾à¤° तà¥à¤® सब मेरे खोये नौकर हो तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ वसà¥à¤¤à¥à¤° वही राजसी वसà¥à¤¤à¥à¤° है अब कहो कथा सच है कि à¤à¥‚ठ? अब यदि कथा सच है तो मेरे नौकर बनो वरना जाकर खाना लाओ | सà¤à¥€ धूरà¥à¤¤ लाजवाब हो गठ|
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