अमानवीय


Author
Rajeev ChoudharyDate
19-Feb-2016Language
HindiTotal Views
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SaurabhUpload Date
19-Feb-2016Download PDF
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सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ ने मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® महिलाओं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ लिंगà¤à¥‡à¤¦ समेत विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ मसलों को लेकर दाखिल जनहित याचिका में शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° को मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® संगठन जमीयत-उलेमा-à¤-हिंद को पकà¥à¤·à¤•à¤¾à¤° बनने की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ दे दी। पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤§à¥€à¤¶ तीरथ सिंह ठाकà¥à¤°, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¤¿ ठके सीकरी और नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¤¿ आर à¤à¤¾à¤¨à¥à¤®à¤¤à¤¿ की 3 सदसà¥à¤¯à¥€à¤¯ पीठने केंदà¥à¤° और इस संगठन को 6 हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में जवाब दाखिल करने का निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ दिया। वही जमीयत उलेमा-à¤-हिंद का कहना है कि परà¥à¤¸à¤¨à¤² लॉ को इस आधार पर वैधता नहीं मिली है कि इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ किसी कानून या सकà¥à¤·à¤® अधिकारी ने बनाया है। परà¥à¤¸à¤¨à¤² लॉ का मूलà¤à¥‚त सà¥à¤°à¥‹à¤¤ उनके अपने धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थ हैं। मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® कानून मूलरूप से पवितà¥à¤° कà¥à¤°à¤¾à¤¨ पर आधारित है और इसलिठयह संविधान के अनà¥à¤šà¥à¤›à¥‡à¤¦ 13 में उलà¥à¤²à¤¿à¤–ित ‘लागू कानून’ की अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के दायरे में नहीं आ सकता। इसकी वैधता को संविधान के à¤à¤¾à¤—-3 के आधार पर दी गयी चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ पर नहीं परखा जा सकता |
à¤à¤¾à¤°à¤¤ की मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® बेटियां समाज का सबसे अशिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ वरà¥à¤— हैं, समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ रोजगार में उनकी तादाद सबसे कम है, अपने ही समाज में दहेज के कारण ठà¥à¤•à¤°à¤¾à¤ˆ जा रही हैं, गरीबी-बेरोजगारी और असंगठित कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की शोषणकारी वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की मजदूरी में पिस रही हैं. तीन तलाक की तलवार उनकी गरà¥à¤¦à¤¨ पर लटकती रहती है, कम उमà¥à¤° में शादी इसके बाद धारà¥à¤®à¤¿à¤• कानून की आड़ में बचà¥à¤šà¥‡ पैदा करवाना à¤à¤• किसà¥à¤® से वो अपनी जिनà¥à¤¦à¤—ी जी ही नहीं पाती कशà¥à¤®à¥€à¤° की à¤à¤• लाख से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बेटियां ‘हाफ-विडो’ यानी अरà¥à¤¦à¥à¤§-विधवा होकर जिंदा लाश बना दी गई हैं| जब पड़ोस में तालिबान अपनी नाफरमान बेटी-बीवी को बीच चौराहे गोली से उड़ा रहा हो, जब आईà¤à¤¸à¤†à¤ˆà¤à¤¸ यौन-गà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ की पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ इसà¥à¤²à¤¾à¤® के नाम पर कर रहा हो- à¤à¤¸à¥‡ में वे कौन लोग हैं जो मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® महिलाओं को पंडावादी लूट, अराजकता, गंदगी और अंधविशà¥à¤µà¤¾à¤¸ के केंदà¥à¤°- मजार और दरगाह के ‘गरà¥à¤-गृह’ में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ की लड़ाई, को सशकà¥à¤¤à¤¿à¤•à¤°à¤£ और नारीवाद का नाम देकर असली लड़ाइयों से धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ हटा रहे हैं? आज मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज शिकà¥à¤·à¤¾,दीकà¥à¤·à¤¾ में काफी पिछड़ा है, कà¥à¤› लोग दीनी तालीम पाकर मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ मदरसों में मौलवी तो बन जाते पर अपने समाज को बà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¥€ चीजो, आधà¥à¤¨à¤¿à¤• शिकà¥à¤·à¤¾, और समाज की मà¥à¤–à¥à¤¯ धारा से अलग रखने की वकालत करते नजर आते है | लेकिन अà¤à¥€ जिस तरीके से कà¥à¤› महिला पतà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® समाज की महिलाओं के लिठमà¥à¤–र हà¥à¤ˆ है उसे देखकर लगता है कि यदि उदारवादी मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® जगत का साथ मिल गया तो समूचे विशà¥à¤µ में मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® महिलाओं की दशा में सà¥à¤§à¤¾à¤° की à¤à¤• उमà¥à¤®à¥€à¤¦ सी जग जायेगी |
पिछले दिनों पेशे से पतà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° 29 वरà¥à¤·à¥€à¤¯ आरिफा जौहरी ने बोहरा समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ की खतने की विवादासà¥à¤ªà¤¦ परंपरा के खिलाफ आवाज़ उठानी शà¥à¤°à¥‚ कर दिया है। खतने का विरोध करने वाले संगठन साहियो की संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• जौहरी कहती हैं, बोहरा समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ में महिलाओं का खतना किठजाने की परंपरा à¤à¤¯à¤¾à¤µà¤¹ है । यह सिरà¥à¤« अफà¥à¤°à¥€à¤•à¥€ जनजातियों में किया जाता है। बोहरा समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ में माना जाता है कि वह सिरà¥à¤« सà¥à¤•à¤¿à¤¨ का à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¤¾ काट रहे हैं। लेकिन इसकी कोई वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ नहीं है, मातà¥à¤° à¤à¤• कà¥à¤°à¥€à¤¤à¤¿ के ऊपर हर साल लाखों बचà¥à¤šà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ इस पीड़ा का दंश à¤à¥‡à¤²à¤¤à¥€ है जिनमे करीब पैतीस फीसदी तो गरीबी के कारण या सही उपचार ना मिलने पर मौत की गोद में सो जाती है| सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के खतना का यह बेहद कà¥à¤°à¥‚र,दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• और अमानवीय बहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ रिवाज पर सरकारे मौन कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ हो जाती है? अब सवाल पैदा होता है कि असल समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से जूà¤à¤¤à¥€ मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® महिलाओं का दà¥à¤ƒà¤– दरà¥à¤¦ इन तथाकथित मौलानाओं को कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ दिखाई नहीं देता वो कौन लोग हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शिकà¥à¤·à¤¾, सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯, रोजगार, तीन-तलाक, à¤à¤—ोड़े पति, पति की दूसरी शादी से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ अà¤à¤¾à¤µ, परिवार नियोजन का अà¤à¤¾à¤µ, जात-पात, दहेज, परिवारों में ही बलातà¥à¤•à¤¾à¤° जैसी à¤à¤¯à¤¾à¤¨à¤• समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के निराकरण के बजाठये धारà¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¥ अपने लिठà¤à¤¾à¤°à¤¤ में पूरà¥à¤£ शरियत का तो विरोध करते है किनà¥à¤¤à¥ जब सविंधान के अनà¥à¤°à¥‚प महिलाओं को कà¥à¤› लाठया राहत मिलती दिखाई देती है तो ये शरियत का बाजा बजाकर अपने धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थ का हवाला देने लगते है |
जब देश का सविंधान बेहतर शिकà¥à¤·à¤¾,समान अधिकार और आरà¥à¤¥à¤¿à¤• खà¥à¤¶à¤¹à¤¾à¤²à¥€ पर बल देता है तो यह धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¥ अपने गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ हाथ में लिठलिठखड़े पाठजाते है | किनà¥à¤¤à¥ बाद में यही लोग मंच पर अपनी गरीबी का रोना रोकर सरकारों पर à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ का आरोप लगाते है आखिर कà¥à¤¯à¥‹à¤‚? कà¥à¤¯à¤¾ सामाजिक खà¥à¤¶à¤¹à¤¾à¤²à¥€ और सरà¥à¤µ समाज समानता à¤à¥€ किसी धरà¥à¤® में बाधक हो सकती है?
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