विष का घट फोड़ दो

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Manmohan Kumar AryaDate
22-Apr-2016Language
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Sandeep AryaUpload Date
25-Apr-2016Download PDF
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बनà¥à¤§à¥à¤“ं दà¥à¤ƒà¤– सिंधॠसे यह देश नैया पार हो।
आरà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की वृदà¥à¤§à¤¿ हो यदि शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° हो।।
शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ होती तो करोड़ो लोग तजकर राम शà¥à¤¯à¤¾à¤®à¥¤
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ वृथा रटते मसी ईसा मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ आदि नाम।।
शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ होती तो न लà¥à¤Ÿà¤¤à¥‡ लाल ललना धन व धाम।
शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ होती तो न बनते हम किसी के à¤à¥€ गà¥à¤²à¤¾à¤®à¥¤à¥¤
शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ हो तो कà¥à¤¯à¥‹à¤‚? à¤à¤²à¤¾ गो-वंश का संहार हो।
आरà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की वृदà¥à¤§à¤¿ हो यदि शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° हो।।
शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आप बिछà¥à¤¡à¤¼à¥‹à¤‚ को अगर अपनायेंगे।
गीत टरकी अरब यूरप के न वो फिर गायेंगे।।
यदि समय आया कठिन तब आपके काम आयेंगे।
à¤à¤•à¥à¤¤ गौ के देश के शà¥à¤°à¥€à¤°à¤¾à¤® के बन जायेंगे।।
धरà¥à¤® वैदिक के लिये उनके हृदय में पà¥à¤¯à¤¾à¤° हो।
आरà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की वृदà¥à¤§à¤¿ हो यदि शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° हो।।
हम ऊंच तà¥à¤® नीच à¤à¤¦à¥à¤¦à¥€ à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ अब छोड़ दो।
यह महा मनहूस मिथà¥à¤¯à¤¾ जाति बनà¥à¤§à¤¨ तोड़ दो।।
पà¥à¤°à¥‡à¤® का पà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¾ पियो विष फूट का घट फोड़ दो।
जो ‘पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶’ उतà¥à¤¥à¤¾à¤¨ चाहो शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ में चित जोड़ दो।।
उपरà¥à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लेखक आरà¥à¤¯à¤œà¤—त के विखà¥à¤¯à¤¾à¤¤ कवि पणà¥à¤¡à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶à¤šà¤¨à¥à¤¦à¥à¤° ‘कविरतà¥à¤¨’ जी (1903-1977) हैं। आपकी उपरà¥à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ रचना लघॠपà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• ‘हिनà¥à¤¦à¥‚ संगठन का मूलमंतà¥à¤°’ में à¤à¥€ उदà¥à¤˜à¥ƒà¤¤ की गई है। यह पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¿à¤•à¤¾ किसी आरà¥à¤¯ पà¥à¤°à¥‡à¤®à¥€ बनà¥à¤§à¥ की रचना है जिसका समà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ आरà¥à¤¯à¤œà¤—त के पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ पं. गंगापà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ ने किया है तथा पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶à¤¨ सनॠ1994 में गंगापà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ विà¤à¤¾à¤—, इलाहाबाद से हà¥à¤† था। शà¥à¤°à¥€ पनà¥à¤¨à¤¾à¤²à¤¾à¤² पीयूष शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ आरà¥à¤¯à¤¸à¤®à¤¾à¤œ के गीतकार और पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ à¤à¤œà¤¨à¥‹à¤ªà¤¦à¥‡à¤¶à¤• रहे हैं। आप पणà¥à¤¡à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶à¤šà¤¨à¥à¤¦à¥à¤° कविरतà¥à¤¨ जी के शिषà¥à¤¯ थे। आपके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लिखा गया कविरतà¥à¤¨ जी का परिचय पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ कर रहे हैं।
राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के अजमेर नगर में पं. बिहारीलाल का यश दूर-दूर तक फैला था। साहितà¥à¤¯à¤•à¤¾à¤° होने के साथ वे संगीत-पà¥à¤°à¥‡à¤®à¥€ à¤à¥€ थे। धारà¥à¤®à¤¿à¤• और सामाजिक उतà¥à¤¸à¤µà¥‹à¤‚ में रंग जमा देते थे। उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ के घर में जनà¥à¤® लिया à¤à¤• होनहार बालक ने। परिवार की आंखों का यह बालक तारा था। उसे देखकर परिवार के लोगों की आंखों में चमक à¤à¤° जाती थी। इस बालक का नाम धरा गया पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ चनà¥à¤¦à¥à¤°à¥¤ गीत-संगीत के पालने में à¤à¥‚लकर पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ चनà¥à¤¦à¥à¤° पर तरूणाई आई। अचà¥à¤›à¥‡ संसà¥à¤•à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ के साथ ही, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ साहितà¥à¤¯ और संगीत की शिकà¥à¤·à¤¾ मिली।
सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से कविरतà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ चनà¥à¤¦à¥à¤° जी का समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• आरà¥à¤¯à¤¸à¤®à¤¾à¤œ से हो गया। फिर कà¥à¤¯à¤¾ था, सोने में सà¥à¤—ंध à¤à¤°à¤¨à¥‡ लगी। आरà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¤¦à¥‡à¤¶à¤•à¥‹à¤‚ में उठने-बैठने, वेद के मनà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ व उन पर आधारित कावà¥à¤¯ रचनाओं को गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾à¤¨à¥‡, समाज में वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ बà¥à¤°à¤¾à¤ˆà¤¯à¥‹à¤‚ को मिटाने में ही लीन हो गà¤à¥¤ छनà¥à¤¦-रचना में इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ रà¥à¤šà¤¿ थी। उठती जवानी में उमंगों में इतने अनूठे रंग à¤à¤° दिठकि जो à¤à¥€ इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤¨à¤¤à¤¾, गà¥à¤—à¥à¤§ रह जाता। पिता गायक थे तो इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ राग-रागनियों और तालों की गहरी सूà¤à¤¬à¥‚ठहोती गई। आरà¥à¤¯à¤¸à¤®à¤¾à¤œ के जलसे-जà¥à¤²à¥‚सों और उतà¥à¤¸à¤µà¥‹à¤‚-समारोहों में इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दूर-दूर से बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ जाने लगा। पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ जी की कीरà¥à¤¤à¤¿ कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ फैली कि इनकी रची हà¥à¤ˆ à¤à¤œà¤¨à¤¾à¤µà¤²à¥€ देश की सीमाà¤à¤‚ पार करती गई। उनके छोटे संगà¥à¤°à¤¹à¥‹à¤‚ को संकलित करके, पà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥‡ पाठकों को उनके अमृत-कलश से कà¥à¤› धाराà¤à¤‚ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ की जा रही हैं। इनकी मिठास मन-पà¥à¤°à¤¾à¤£ में नवयौवन à¤à¤° देगी।
पणà¥à¤¡à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ चनà¥à¤¦à¥à¤° कविरतà¥à¤¨ जी के गीतों का à¤à¤• संगà¥à¤°à¤¹ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ दीकà¥à¤·à¤¾à¤¨à¤¨à¥à¤¦ सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ ने अपने ‘समरà¥à¤ªà¤£ शोध संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨, साहिबाबाद, गाजियाबाद, उतà¥à¤¤à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶’ से सनॠ1994 में पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶à¤¿à¤¤ किया जिसमें उनके राग रागिनी चितà¥à¤°à¤ªà¤Ÿ तथा आधà¥à¤¨à¤¿à¤• तरà¥à¤œà¥‹à¤‚ से ओत-पà¥à¤°à¥‹à¤¤ साहितà¥à¤¯à¤¿à¤•, धारà¥à¤®à¤¿à¤•, राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ वीर-रस पूरà¥à¤£ à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• à¤à¤œà¤¨à¥‹à¤‚, कविताओं, गीतों को परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤, परिवरà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤¤ संशोधत रूप में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया गया है। इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• में 118 गीतों व à¤à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ को समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ किया गया है। हमारा सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ है कि यह गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ रतà¥à¤¨ हमारे पास है। इस समय हमारे समà¥à¤®à¥à¤– ‘‘पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ गीत व अनà¥à¤¯ रचनाà¤à¤‚” नाम से ‘विजयकà¥à¤®à¤¾à¤° गोविनà¥à¤¦à¤°à¤¾à¤® हासाननà¥à¤¦, दिलà¥à¤²à¥€’ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ 1999 में पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶à¤¿à¤¤ कवि पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶à¤šà¤¨à¥à¤¦à¥à¤° जी का संगà¥à¤°à¤¹ है जिसमें 185 गीत व à¤à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ का संगà¥à¤°à¤¹ है। आरà¥à¤¯à¤¸à¤®à¤¾à¤œ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿ सà¤à¤¾à¤“ं के पास धन की कमी नहीं हैं। अनेकानेक निधियां व समà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ होती हैं। यदि वह पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें तो किसी अचà¥à¤›à¥‡ गायक दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इन सà¤à¥€ à¤à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ को सà¥à¤° व ताल में गवाकर आडियों व वीडियों सीडी आदि बनाई जा सकती है। जब à¤à¥€ कोई विदà¥à¤µà¤¾à¤¨, कवि व लेखक कोई रचना करता है तो उसका उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ उन विचारों व रचनाओं का अधिकाधिक पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° होता है। हमने अनà¥à¤à¤µ किया है कि पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• लिख दिठजाने व पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶à¤¿à¤¤ हो जाने पर à¤à¥€ अधिक लोग उससे लाठनहीं उठाते। आरà¥à¤¯à¤¸à¤®à¤¾à¤œ में अचà¥à¤›à¤¾ व शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ गाने वाले à¤à¤œà¤¨à¥‹à¤ªà¤¦à¥‡à¤¶à¤•à¥‹à¤‚ की कमी नहीं है। इनका उपयोग करके पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ जी के सà¤à¥€ व अधिकाधिक गीतों व à¤à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ की आडियो वीडियो सीडी तैयार की जानी चाहिये। à¤à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ का लाठतो उसे सà¥à¤° ताल में मधà¥à¤° सà¥à¤µà¤° में सà¥à¤¨à¤•à¤° ही आता है। हम आशा करते हैं कि किसी योगà¥à¤¯ ऋषिà¤à¤•à¥à¤¤ का इस ओर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ जायेगा और यह कारà¥à¤¯ आने वाले समय में आरमà¥à¤ व पूरà¥à¤£ होगा। हम यहां आरà¥à¤¯à¤œà¤—त के विखà¥à¤¯à¤¾à¤¤ विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ व अनेक मधà¥à¤° à¤à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ के रचयिता पं. बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¦à¥‡à¤µ विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤‚कार की पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ जी पर दी गई समà¥à¤®à¤¤à¤¿ को पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ कर रहे हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा है कि ‘शà¥à¤°à¥€ पं. पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶à¤šà¤¨à¥à¤¦à¥à¤° जी आरà¥à¤¯à¤¸à¤®à¤¾à¤œ के à¤à¤• रतà¥à¤¨ हैं। उनकी कविताओं में केवल छनà¥à¤¦ बनà¥à¤§à¤¨ ही नहीं रस à¤à¥€ है। आरà¥à¤¯ पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ का करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ है कि इस रस à¤à¤£à¥à¤¡à¤¾à¤° का आदर करें।’
पणà¥à¤¡à¤¿à¤¤ जी दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रचे गये विपà¥à¤² साहितà¥à¤¯ में पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ à¤à¤œà¤¨à¤¾à¤µà¤²à¥€ à¤à¤¾à¤—-5, पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ à¤à¤œà¤¨ सतà¥à¤¸à¤‚ग, पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶à¤—ीत 4 à¤à¤¾à¤—, पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ तरंगिणी, कहावत कवितावली, गोगीत पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶, दयाननà¥à¤¦ पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ खंड 1 महाकावà¥à¤¯, राषà¥à¤Ÿà¥à¤° जागरण (चीन आकà¥à¤°à¤®à¤£ के समय लिखी गई कविताà¤à¤‚) तथा सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤¨à¤¨à¥à¤¦ गà¥à¤£à¤—ान समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ हैं। आपका सनॠ1971 में अजमेर के अनासागर तट पर सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• अà¤à¤¿à¤¨à¤¨à¥à¤¦à¤¨ किया गया था जिसकी अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤¤à¤¾ राजाधिराज सà¥à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¤¦à¥‡à¤¶à¤œà¥€ शाहपà¥à¤°à¤¾à¤§à¥€à¤¶ ने की थी। इस आयोजन के अवसर पर आपको ‘‘पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ अà¤à¤¿à¤¨à¤¨à¥à¤¦à¤¨ गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥” à¤à¥‡à¤‚ट किया गया था जिसका समà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ आरà¥à¤¯à¤œà¤—त के विखà¥à¤¯à¤¾à¤¤ विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ लेखक डा. à¤à¤µà¤¾à¤¨à¥€à¤²à¤¾à¤² à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ जी ने किया था।
पणà¥à¤¡à¤¿à¤¤ जी के अनेक अति लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ à¤à¤œà¤¨ हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आरà¥à¤¯à¤¸à¤®à¤¾à¤œ में गाया जाता है परनà¥à¤¤à¥ लोग व गाने वाले à¤à¥€ इसके लेखक के नाम से परिचित नहीं होते। हम पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करेंगे कि आने वाले समय में पणà¥à¤¡à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤•à¤¾à¤¶ जी के कà¥à¤› लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ à¤à¤œà¤¨ लेख के माधà¥à¤¯à¤® से पाठकों तक पहà¥à¤‚चायें। हमने आज पणà¥à¤¡à¤¿à¤¤ जी की जो उपरà¥à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ रचना पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ की है, पाठक उसे पसनà¥à¤¦ करेंगे व उसमें निहित आरà¥à¤¯ जाति रकà¥à¤·à¤¾ के गहन सनà¥à¤¦à¥‡à¤¶ को जानकर उसे अपनायेंगे व फैलायेंगे। इस à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ के साथ लेख को विराम देते हैं।
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